नई दिल्ली: हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जितिया व्रत करने से संतान की रक्षा और उनके कल्याण की कामना पूरी होती है। जितिया व्रत को कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है। कई परंपराओं में महिलाएं इस दौरान अन्न के साथ जल का भी त्याग करती हैं। यही वजह है कि इसे निर्जला व्रत के रूप में भी जाना जाता है।
3 अक्टूबर को रखा जाएगा जितिया व्रत
द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। अष्टमी तिथि 2 अक्टूबर सुबह 7:59 बजे शुरू होगी और 4 अक्टूबर सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के साथ व्रत और पूजा करेंगी।
तीन दिनों तक चलता है जितिया पर्व
जितिया को केवल एक दिन का व्रत नहीं माना जाता। इसकी धार्मिक परंपरा तीन दिनों में पूरी होती है।
2 अक्टूबर – नहाय-खाय:
पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होगी। व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान और पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन के व्रत की तैयारी करती हैं।
3 अक्टूबर – निर्जला जितिया व्रत:
इस दिन मुख्य व्रत रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद व्रत का पालन किया जाता है।
4 अक्टूबर – पारण:
4 अक्टूबर को पारण के साथ जितिया व्रत का समापन होगा। इसके साथ तीन दिवसीय पर्व की परंपरा पूरी होगी।
बिहार, झारखंड और पूर्वांचल में विशेष महत्व
जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसके अलावा नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी इस पर्व की परंपरा देखने को मिलती है। मैथिली, भोजपुरी और थारू भाषी समुदायों में जितिया को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। नेपाल में इसे जितिया पावनी के नाम से भी जाना जाता है।
क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत?
जितिया व्रत की प्रमुख विशेषता इसका निर्जला स्वरूप है। धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रती महिलाएं अन्न और जल का त्याग कर संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना करती हैं। हालांकि, निर्जला व्रत सभी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत के कठोर नियमों का पालन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।