सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि अधिक मास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है।
कब है अधिक मासिक शिवरात्रि 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 13 जून 2026 को दोपहर 4:07 बजे शुरू होगी और 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर अधिक मासिक शिवरात्रि 13 जून 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 बजे से 04:42 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से 12:49 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से 03:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:18 बजे से 07:39 बजे तक
निशिता पूजा मुहूर्त: रात 11:01 बजे से 12:41 बजे तक
कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का विधिवत पूजन करें। शिवलिंग का गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करें। पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें तथा शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
मन को शांत रखें और क्रोध, विवाद तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
शिव पूजन के समय पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें।
रात्रि जागरण और शिव नाम का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
क्या दान करना शुभ माना जाता है?
मासिक शिवरात्रि के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्त्र, अन्न, धन, चावल, दूध और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है, चंद्र दोष कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।