हिंदू धर्म में हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर Ganesha की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि और खुशहाली में वृद्धि होती है।
ऐसे में आइए जानते हैं विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (अधिक) माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जून 2026 को रात 09 बजकर 21 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 04 जून 2026 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा।
उदयातिथि के अनुसार विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जून 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
चंद्रोदय का समय
03 जून 2026 को रात 10:04 बजे से 10:43 बजे तक
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट
पूजा के दौरान इन सामग्रियों का उपयोग करें:
फूल
जनेऊ
लौंग
दीपक
पीला कपड़ा
चौकी
दूध
जल
धूप
देसी घी
11 या 21 तिल के लड्डू
मोदक
गंगाजल
फल
कलश
सुपारी
गणेश जी की प्रतिमा
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन रखें इन बातों का ध्यान
गणेश जी को जल, रोली, चंदन और लाल फूल अर्पित करें।
व्रत कथा का पाठ और गणेश मंत्रों का जप करें।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न एवं धन का दान करें।
भगवान गणेश को मोदक या तिल के लड्डुओं का भोग जरूर लगाएं।
व्रत के दौरान फलाहार करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
क्रोध और विवाद से बचें तथा मन को शांत रखें।
ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें।
चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत खोलें।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की विशेष कृपा दिलाता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।