खड़गपुर: भारतीय रेलवे में सफर को और अधिक सुरक्षित बनाने तथा रेल दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी तकनीक सामने आई है। अब देश में ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रोबोटिक तकनीक का सहारा लिया जा सकेगा। आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर दिलीप कुमार प्रतिहार और उनके अधीन शोधकर्ताओं (Researchers) की एक टीम ने एक बेहद खास, स्वचालित (Automatic) और इंटेलिजेंट रोबोट विकसित किया है। यह रोबोट रेलवे लाइनों का बारीकी से निरीक्षण कर उसमें आने वाली किसी भी खराबी को तुरंत पकड़ने में सक्षम है।
तीन महीने में पेटेंट के लिए होगा आवेदन
मिली जानकारी के अनुसार, इस रोबोट का काम अंतिम चरण में है और अगले तीन महीनों के भीतर शोधकर्ता इसके पेटेंट (Patent) के लिए आवेदन करेंगे। इस आविष्कार के बारे में बताते हुए प्रोफेसर दिलीप कुमार प्रतिहार ने कहा, "दुर्गम इलाकों, बेहद खराब मौसम या फिर रात के घने अंधेरे में इंसानी आंखों के लिए रेलवे ट्रैक की हर छोटी और बारीक कमी या दरार को पकड़ पाना हमेशा संभव नहीं होता है। लेकिन हमारा बनाया हुआ यह रोबोट विपरीत परिस्थितियों में भी इस काम को बेहद आसानी और सटीकता से कर सकता है।"
लागत होगी बेहद कम
प्रोफेसर दिलीप ने इसकी लागत के बारे में बताते हुए कहा कि सामान्य तौर पर इस तरह के एडवांस रोबोट को बनाने में 15 से 20 लाख रुपये का खर्च आता है। लेकिन अगर भारतीय रेलवे के लिए इसका बड़े पैमाने पर (Mass Production) उत्पादन किया जाता है, तो इसकी लागत काफी कम हो जाएगी और यह प्रति रोबोट महज 2 से 3 लाख रुपये में तैयार हो जाएगा।
रिमोट से कंट्रोल होगा रोबोट, जीपीएस से मिलेगी लोकेशन
यह रोबोट आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से लैस है, जो बैटरी से संचालित होता है। इसे रिमोट कंट्रोल के जरिए आसानी से संचालित किया जा सकता है। इसमें इन-बिल्ट जीपीएस (GPS) सिस्टम भी लगाया गया है। जब यह रोबोट रेलवे ट्रैक पर आगे बढ़ेगा, तो पटरियों की जांच करता रहेगा। यदि ट्रैक पर कहीं कोई दरार (Crack) मिलती है, पटरियों के बीच की दूरी में कोई गड़बड़ी होती है या जमीन से उसकी ऊंचाई में कोई अंतर (तारतम्य) दिखाई देता है, तो यह रोबोट तुरंत वहीं रुक जाएगा। रुकने के साथ ही यह रोबोट उस खराबी वाली जगह की हाई-क्वालिटी तस्वीरें खींचेगा और कंट्रोल रूम को भेज देगा। लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिए रोबोट को मॉनिटर कर रहा रेलवे कर्मचारी तुरंत उन तस्वीरों को देख सकेगा और जीपीएस की मदद से सटीक लोकेशन का पता लगा सकेगा। इस रीयल-टाइम डेटा के आधार पर रेलवे प्रशासन तुरंत संबंधित मरम्मत कर्मियों को मौके पर भेजकर ट्रैक को ठीक कर सकेगा, जिससे एक बड़ा हादसा होने से पहले ही टल जाएगा।