मुंबई - फिल्ममेकर और आमिर खान की पूर्व पत्नी किरण राव ने आज की पीढ़ी के प्रेम और रिश्तों को लेकर अपनी राय साझा की है। ‘लस्ट स्टोरीज 3’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने पुरानी और नई पीढ़ी के रिश्तों के बीच बदलते नजरिए पर बात की। किरण का कहना है कि आज के युवा अपने रिश्तों और निजी जिंदगी को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा स्वतंत्र तरीके से फैसले लेते हैं।
रिश्तों में कम हुआ सामाजिक दबाव
किरण राव ने कहा कि पहले लोगों से एक तय तरह के रिश्ते और सामाजिक मानदंडों के मुताबिक जीवन जीने की उम्मीद की जाती थी। इसके विपरीत आज की पीढ़ी के पास अपनी पसंद और भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने की अधिक स्वतंत्रता है। उनके मुताबिक, समय के साथ रिश्तों को देखने का नजरिया भी बदला है। आज के युवा अपने फैसलों को लेकर ज्यादा स्पष्ट दिखाई देते हैं और व्यक्तिगत पसंद को महत्व देते हैं। उन्होंने इस बदलाव को पीढ़ियों के बीच आए सामाजिक परिवर्तन से जोड़कर देखा।
शादी से पहले रिश्तों पर क्या बोलीं किरण?
किरण राव ने यह भी कहा कि आज की पीढ़ी शादी से पहले शारीरिक संबंधों को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा सहज और स्वतंत्र है। उनके अनुसार, युवा अपनी जिंदगी को अपनी पसंद और समझ के अनुसार जीने का विकल्प चुन रहे हैं। उन्होंने इस बदलाव को किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित न बताते हुए समाज में आए व्यापक परिवर्तन का हिस्सा बताया। किरण के मुताबिक, लोगों के खुद को व्यक्त करने के तरीके भी बदल गए हैं और इसी वजह से रिश्तों की परिभाषा भी पहले जैसी नहीं रही।
‘लस्ट स्टोरीज 3’ की कहानी का संदर्भ
किरण राव से यह सवाल ‘लस्ट स्टोरीज 3’ के प्रमोशन के दौरान पूछा गया था। उनसे ऐसी कहानी को लेकर उनकी सोच जानने की कोशिश की गई, जिसमें युवा प्रेम और आकर्षण को लेकर ज्यादा बेफिक्र नजर आते हैं। इस पर बात करते हुए किरण ने कहानी के मूल विचार को दो युवाओं के इर्द-गिर्द बताया। ये दोनों एक-दूसरे की तरफ आकर्षित हैं और उनके बीच किसी तरह का पारंपरिक बंधन नहीं है। ऐसे में कहानी इस सवाल को सामने रखती है कि जब दो लोग एक-दूसरे की ओर आकर्षित हों और उन पर पुराने सामाजिक बंधन न हों, तो वे अपने रिश्ते को किस दिशा में ले जाते हैं।
बदलते समय के साथ बदल रहे रिश्ते
किरण राव के मुताबिक, आज की दुनिया पहले से काफी अलग है। तकनीक, सोशल मीडिया और बदलती सामाजिक सोच ने लोगों के बातचीत करने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के तरीकों को भी प्रभावित किया है। नई पीढ़ी रिश्तों में अपनी पसंद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आपसी समझ को अधिक महत्व देती दिखाई देती है। वहीं, पुरानी पीढ़ी के रिश्तों में सामाजिक अपेक्षाओं और पारंपरिक नियमों की भूमिका अधिक मजबूत थी।
किरण की टिप्पणी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है। उनके मुताबिक, आज युवाओं को अपनी भावनाएं और इच्छाएं ज्यादा खुलकर व्यक्त करने का अवसर मिल रहा है। यही बदलाव आधुनिक रिश्तों की कहानियों और सिनेमा में भी दिखाई देने लगा है।