कोलकता. शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान अपने निजी जीवन को लेकर लोगों की जिज्ञासाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी थी। भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनसे पूछते हैं कि जब उनके भाई विवाहित हैं, तो उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की। इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका जीवन पूरी तरह सार्वजनिक जीवन, राजनीति और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है, इसलिए उन्होंने अविवाहित रहने का रास्ता चुना।
“मेरा राजनीतिक दायित्व ही मेरा परिवार”
सभा में बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि वे स्वयं को अकेला व्यक्ति नहीं मानते। उनके अनुसार जनता, कार्यकर्ता और सामाजिक जिम्मेदारियां ही उनके जीवन का वास्तविक परिवार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका अधिकांश समय लोगों के बीच बीतता है और इसी कारण उन्होंने व्यक्तिगत जीवन की बजाय सार्वजनिक जीवन को प्राथमिकता दी।
बेटे के फैसले से नाराज हो गए थे पिता
शिशिर अधिकारी ने भी एक पुराने इंटरव्यू में इस विषय पर खुलकर चर्चा की थी। उन्होंने बताया था कि जब शुभेंदु अधिकारी ने विवाह न करने का निर्णय लिया, तब वे काफी नाराज हो गए थे। शिशिर अधिकारी के अनुसार ग्रामीण और पारिवारिक समाज में सामान्य अपेक्षा यही होती है कि बेटा बड़ा होकर विवाह करे, परिवार बसाए और घर की परंपरा आगे बढ़ाए। ऐसे में उनके लिए यह फैसला स्वीकार करना आसान नहीं था।
गुस्सा भी आया, लेकिन बेटे की सोच को समझा
शिशिर अधिकारी ने स्वीकार किया था कि गुस्से में उन्होंने बेटे को काफी डांटा भी था, लेकिन बाद में उन्हें स्वयं इस बात का पछतावा हुआ। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बेटे पर हाथ नहीं उठाया। उनके मन में केवल यही चिंता थी कि परिवार की जिम्मेदारियां और सामाजिक विरासत आगे कौन संभालेगा। समय के साथ उन्होंने शुभेंदु के फैसले और उनकी प्रतिबद्धता को समझना शुरू किया।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ समर्पण का सफर
शुभेंदु अधिकारी ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया था कि वे वर्ष 1987 से छात्र राजनीति से जुड़े हुए हैं। धीरे-धीरे राजनीति उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य बन गई और उन्होंने स्वयं को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन के लिए समर्पित कर दिया। उनके अनुसार राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा और जनसरोकारों से जुड़ी जिम्मेदारी है।
स्वतंत्रता सेनानियों से मिली प्रेरणा
शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनके क्षेत्र के तीन प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी — सतीश सामंत, सुशील धारा और अजय मुखर्जी — अविवाहित रहे थे। उन्होंने बताया कि इन्हीं नेताओं से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी अपना पूरा जीवन सार्वजनिक कार्यों के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। उनके मुताबिक इन नेताओं का त्याग और समर्पण हमेशा उनके लिए प्रेरणास्रोत रहा है।
“जनता के लिए ज्यादा समय दे पाता हूं”
शुभेंदु अधिकारी का मानना है कि अविवाहित रहने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बिना पारिवारिक दायित्वों के जनता और राजनीति को अधिक समय दे पाते हैं। उन्होंने कहा था कि जब पारिवारिक जिम्मेदारियां कम होती हैं, तब व्यक्ति अपनी पूरी ऊर्जा समाज और लोगों के बीच काम करने में लगा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अपने माता-पिता की सेवा और देखभाल को वे अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।
परिवारवाद से दूरी बनाए रखने की भी सोच
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वे राजनीति में परिवारवाद को उचित नहीं मानते। शुभेंदु अधिकारी के अनुसार सत्ता और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल परिवार के अन्य सदस्यों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि उन्होंने स्वयं को एक सीमित और अनुशासित सार्वजनिक जीवन तक केंद्रित रखा।