लखनऊ- अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला है। बिना किसी संगठन का नाम लिए उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे राजनीतिक हलकों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा पर निशाना माना जा रहा है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
'सुरंगजीवी अब बाहर आने को मजबूर'—अखिलेश का तंज
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अब "सुरंगजीवियों" को बाहर आना ही पड़ा है, क्योंकि अपयश का पानी सुरंग में गले तक भर चुका है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए आस्था के साथ चंदा दिया था, लेकिन अब जब चढ़ावे से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो भाजपा के बड़े नेता सामने आने से बच रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो नेता हर मुद्दे पर आगे रहते हैं, वे इस मामले में पीछे क्यों हैं और जिम्मेदारी किसी दूसरे पर क्यों डाली जा रही है।
'महापाप' का दोष दूसरों पर डालने की साजिश का आरोप
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में जिम्मेदारी से बचने और जनाक्रोश से खुद को दूर रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कथित रूप से "महापाप" का दोष दूसरों पर डालने की रणनीति है। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग पहले दूसरों के खिलाफ षड्यंत्र रचते थे, अब वही आपस में एक-दूसरे के खिलाफ खुलासे कर रहे हैं। उनके अनुसार, आंतरिक टकराव की वजह से अब कई राज सामने आ सकते हैं।
'सत्य हर पाप का हिसाब करेगा'
अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग कथित तौर पर सुरंग के रास्ते बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि एक समय ऐसा आएगा जब सत्य उनके सामने होगा। उन्होंने कहा कि न केवल अयोध्या, बल्कि पूरा देश और करोड़ों श्रद्धालु इस मामले को भूलेंगे नहीं। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था से जुड़े धन का यदि दुरुपयोग हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर लगातार तेज हो रही राजनीति
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh भी इस मामले में अयोध्या जाकर मुकदमा दर्ज कराने की घोषणा कर चुके हैं। वहीं, भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।