अयोध्या - अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। दान राशि की गणना की निगरानी करने वाले बैंक कर्मचारियों की भूमिका अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। हालांकि अभी तक उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन एसआईटी और पुलिस जांच में दो बैंक अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
एसआईटी जांच में सामने आई साठगांठ की आशंका
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जांच में उन बैंक कर्मियों के नाम सामने आए हैं जिनका उल्लेख पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह और आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने भी किया था। आरोप है कि ये कर्मचारी लंबे समय से दान राशि की गणना के कार्य में लगे हुए थे। इसके बावजूद संबंधित बैंक ने अपने नौ कर्मचारियों को अब तक नहीं हटाया है।
बैंक ने ट्रस्ट पर डाली जिम्मेदारी
बैंक शाखा प्रबंधक का कहना है कि कर्मचारियों को बदलने का फैसला उच्च अधिकारी करेंगे। वहीं मंदिर से जुड़े लोगों का आरोप है कि बैंक अब अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है और पूरा दोष ट्रस्ट पर डाल रहा है। उनका कहना है कि यदि बैंक कर्मियों की कोई भूमिका नहीं थी तो पहले से मिली शिकायतों के बावजूद उन्होंने विरोध या कार्रवाई क्यों नहीं की।
17 साल से तैनात आरएमओ का तबादला
मामले के सामने आने के बाद रामजन्मभूमि परिसर में करीब 17 वर्षों से तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (आरएमओ) अर्जुनदेव का गोरखपुर तबादला कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2009 से परिसर में तैनात थे और बीच में हुए स्थानांतरण भी रुकवा दिए गए थे।
सीसीटीवी निगरानी पर भी उठे सवाल
अर्जुनदेव के पास गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद दान राशि की कथित चोरी का मामला सामने आने से उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उनकी आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से अच्छी जान-पहचान थी और उन्हें कई बार गणना कक्ष तक साथ जाते देखा गया था।
जांच जारी, कई लोगों के बयान दर्ज
पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही हैं। विभिन्न कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चढ़ावा चोरी के मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और किसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।