उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ऊर्जा विभाग की बड़ी समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए कि गांव हो या शहर, कहीं भी बिजली संकट नहीं होना चाहिए और हर हाल में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सभी पावर यूनिट्स को पूरी दक्षता से चलाने और ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था सिर्फ तकनीकी विषय नहीं, बल्कि किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम जनता के जीवन से जुड़ा मुद्दा है।
30 हजार मेगावाट के पार पहुंची बिजली मांग
समीक्षा बैठक में बताया गया कि इस साल प्रदेश की पीक बिजली मांग 30,339 मेगावाट तक पहुंच गई है। अप्रैल-मई के दौरान बिजली खपत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंधी-तूफान जैसी परिस्थितियों में भी त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रहे और खराब फीडर व ट्रांसफॉर्मर जल्द से जल्द ठीक किए जाएं। उन्होंने फीडर वाइज मॉनिटरिंग कर जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।
स्मार्ट मीटर और कॉल सेंटर व्यवस्था पर भी फोकस
बैठक में स्मार्ट मीटर व्यवस्था और उपभोक्ता सेवाओं की भी समीक्षा हुई। सरकार ने निर्देश दिए कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिजली बिल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही शिकायत मिलने पर लोगों को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक ठीक होगी। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 89 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा
बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। वहीं गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। सरकार भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई ऊर्जा परियोजनाओं पर भी काम कर रही है।