लखनऊ। उत्तरप्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव 2026 अब विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाएंगे। 26 मई को प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके बाद वहां प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी।
सरकार ने इस बार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने का फैसला लिया है। इससे पहले एडीओ पंचायत को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाता था, लेकिन ग्राम प्रधान संघ की मांग को स्वीकार करते हुए यह बदलाव किया गया है।
ओबीसी आरक्षण और आयोग गठन में देरी बनी वजह
पंचायत चुनाव समय पर न होने के पीछे पिछड़ा वर्ग आरक्षण आयोग के गठन में देरी, मतदाता सूची के पुनरीक्षण में विलंब और हाईकोर्ट में लंबित मामलों को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।हालांकि सरकार ने आयोग का गठन कर दिया है, लेकिन उसकी रिपोर्ट आने में समय लगने की संभावना है, जिसके चलते चुनाव टल गए हैं।
ग्राम प्रधानों को राहत, विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रधानों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कामकाज अब बेहतर तरीके से चल सकेगा।वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर चुनाव टालने को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी जानबूझकर की गई है, जिससे चुनाव समय पर नहीं हो सके।अब पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।