उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से मौसम में आए अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय पर हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने खेती-किसानी की तैयारियों को प्रभावित किया है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल गिरकर जमीन पर बिछ गई है, जबकि कुछ जगहों पर बारिश का पानी जमा होने से खेत जलमग्न हो गए हैं। इसका असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि रबी सीजन की तैयारियों पर भी पड़ने की आशंका है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक मौसम को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में खराब मौसम की चेतावनी जारी की है।
धान की कटाई के समय बेमौसम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
अक्टूबर का आखिरी सप्ताह किसानों के लिए धान की कटाई और मड़ाई के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। इस समय खेतों में फसल तैयार होती है और किसान उसे जल्द से जल्द काटकर सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं। लेकिन चक्रवात अर्नब के प्रभाव से बदले मौसम ने किसानों की इस तैयारी को प्रभावित कर दिया है। 29 अक्टूबर को वाराणसी और आसपास के इलाकों में हुई बारिश के बाद कई स्थानों पर धान की खड़ी फसल गिरने की खबरें सामने आई हैं। तेज हवाओं के कारण पौधे जमीन पर झुक गए हैं, जिससे कटाई करना मुश्किल हो सकता है। खेतों में नमी बढ़ने और पानी जमा होने से फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है। किसानों को डर है कि अगर लगातार बारिश जारी रही तो उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर सकता है।
पूर्वांचल के कई जिलों में मौसम का असर
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिला है। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ और बलिया में किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा मीरजापुर, भदोही और सोनभद्र के इलाकों में भी मौसम के बदलाव का असर सामने आया है। इन क्षेत्रों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगहों पर खेतों में पानी भरने से कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को अब मौसम सामान्य होने का इंतजार है, ताकि वे अपनी तैयार फसल को सुरक्षित निकाल सकें। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहती है तो फसल नुकसान का दायरा बढ़ सकता है।
पश्चिमी यूपी में ओलावृष्टि और पूर्वांचल में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। इस अलर्ट ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि खेतों में अभी भी बड़ी मात्रा में धान की फसल तैयार खड़ी है। बारिश और ओलावृष्टि से फसल को अतिरिक्त नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। खुले खेतों में रखी कटी हुई फसल और कृषि उपज भी बारिश की चपेट में आ सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और अपनी उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी जा रही है।
31 अक्टूबर से मिल सकती है खराब मौसम से राहत
लगातार बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। मौसम विभाग के 30 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 31 अक्टूबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और खराब मौसम का प्रभाव कम हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह सामान्य रहेगा। स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही और मौसम में बदलाव की संभावना बनी रह सकती है। किसानों के लिए अगले कुछ दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। मौसम साफ होने पर वे धान की कटाई और खेतों से पानी निकालने का काम दोबारा शुरू कर सकेंगे।
धान के अलावा सब्जियों और आलू की खेती पर भी असर
बेमौसम बारिश का असर केवल धान की खेती तक सीमित नहीं रहने वाला है। खेतों में पानी भरने से सर्दियों में उगाई जाने वाली सब्जियों की खेती भी प्रभावित हो सकती है। टमाटर, गोभी, मटर और दूसरी मौसमी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को जलभराव के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन किसानों ने आलू की बुआई के लिए खेत तैयार कर रखे हैं, उनके सामने भी नई चुनौती खड़ी हो गई है। खेतों में जरूरत से ज्यादा नमी होने पर बुआई का काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों की जलनिकासी और मिट्टी की स्थिति पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
फसल नुकसान पर मुआवजे की उम्मीद, सर्वे के बाद साफ होगी तस्वीर
मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने अब फसल नुकसान की भरपाई का सवाल भी खड़ा हो गया है। प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन और कृषि विभाग नुकसान का आकलन कर उन्हें राहत पहुंचाएंगे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों को निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार फसल नुकसान का दावा करने की सुविधा मिलती है। इसके लिए किसानों को नुकसान की सूचना तय समयसीमा के भीतर बीमा कंपनी, कृषि विभाग या संबंधित आधिकारिक माध्यम तक पहुंचानी होती है। हालांकि, 30 अक्टूबर की बारिश से प्रदेश में कुल कितने हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, इसका प्रमाणित जिलेवार सरकारी आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में वास्तविक नुकसान का पता प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से किए जाने वाले सर्वे के बाद ही चल सकेगा। किसानों की नजर अब सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत पर टिकी है।
किसानों के सामने फसल बचाने की सबसे बड़ी चुनौती
फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतों में खड़ी और कटी हुई धान की फसल को सुरक्षित बचाना है। जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां जल्द से जल्द जलनिकासी करना जरूरी हो गया है। वहीं, जिन किसानों ने धान काट लिया है, उन्हें उपज को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखने की जरूरत है। मौसम साफ होने के बाद ही कई इलाकों में कटाई और मड़ाई का काम तेजी पकड़ पाएगा। बारिश के कारण खेती का पूरा शेड्यूल प्रभावित होने से रबी सीजन की तैयारियों में भी देरी हो सकती है। अब किसानों को उम्मीद है कि मौसम जल्द सामान्य होगा और प्रशासन की ओर से नुकसान का सही आकलन कर उचित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और सरकारी सर्वे से ही यह स्पष्ट होगा कि चक्रवात अर्नब ने यूपी की खेती को कितना नुकसान पहुंचाया है।