लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली कटौती के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक कर सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि गांव हो या शहर, किसी भी इलाके में बिजली संकट नहीं होना चाहिए और आम जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम लोगों को बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए और लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो चुकी है।
इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती मांग को देखते हुए हर संभव स्रोत से बिजली उपलब्ध कराई जाए।
ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने के निर्देश
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत और आधुनिक बनाने पर जोर दिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में इस समय 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें और 715 उपकेंद्र संचालित हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में तकनीकी खराबियों को न्यूनतम रखा जाए और किसी भी फॉल्ट की स्थिति में तुरंत सुधार कार्य शुरू किया जाए।
फील्ड अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बंद होने या शिकायत निस्तारण में देरी जैसी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने और फील्ड अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले वर्षों की तुलना में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत की कमी आई है।
उपभोक्ताओं को मिले सही जानकारी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध जानकारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह भी बताया जाए कि समस्या कब तक ठीक होगी। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और शिकायतों में पारदर्शिता आएगी।
स्मार्ट मीटर और कॉल सेंटर व्यवस्था पर फोकस
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पोस्टपेड व्यवस्था में वापस लाने का फैसला लिया है।
साथ ही नई 1912 हेल्पलाइन कॉल सेंटर व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत समाधान हो सके।
बढ़ती गर्मी से बिजली मांग रिकॉर्ड स्तर पर
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अप्रैल और मई में तापमान बढ़ने के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ी है। प्रदेश में पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
20 से 22 मई के बीच उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली मांग वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती मांग के बावजूद बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।