चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन करीब 3 किलोमीटर लंबी टनल में अचानक लैंडस्लाइड के बाद पानी और मलबा घुस गया। हादसे के वक्त टनल के अंदर काम कर रहे 22 मजदूर फंस गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सभी फंसे मजदूरों को टनल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन हादसे में 7 मजदूरों की मौत की सूचना है।
शाम करीब 7 बजे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक हादसा गुरुवार 13 अगस्त की शाम करीब 7 बजे हुआ। पीपलकोटी के मायापुर में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी का रिसाव शुरू हुआ। इसी दौरान लैंडस्लाइड होने से बड़ी मात्रा में मलबा अंदर आ गया।पानी और मलबा टनल के भीतर तेजी से भरने के कारण वहां काम कर रहे मजदूरों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हुआ और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
टनल के अंदर फंसे थे 22 मजदूर
हादसे के समय टनल के अंदर कुल 22 मजदूर मौजूद थे। मलबा और पानी भरने के कारण सभी मजदूर अंदर फंस गए थे। राहत और बचाव टीमों ने टनल के भीतर पहुंचकर मजदूरों को बाहर निकालने का अभियान चलाया।रेस्क्यू के दौरान टनल में पानी और मलबा होने के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयास के बाद मजदूरों को बाहर निकालने में सफलता मिली।
हादसे में 7 मजदूरों की मौत
हादसे में 7 मजदूरों की मौत की सूचना है रेस्क्यू किए गए मजदूरों में से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है।
पानी रिसने और मलबा आने से बढ़ी मुश्किल
निर्माणाधीन टनल में पानी का अचानक रिसाव और उसके बाद हुए भू-स्खलन ने स्थिति को गंभीर बना दिया। टनल के भीतर पानी और मलबा भरने से मजदूरों तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो गया था।बचाव दलों ने स्थिति को देखते हुए सावधानी से अभियान चलाया। टनल के अंदर मौजूद मलबे को हटाने और पानी के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
चमोली में हादसे के बाद बढ़ी चिंता
पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन और प्राकृतिक घटनाओं के बीच चमोली की यह घटना एक बार फिर निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी घुसने और लैंडस्लाइड के कारण मजदूरों की जान खतरे में पड़ गई।फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता हादसे में प्रभावित मजदूरों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करना है।