उत्तराखंड सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य में भूकंप का शीघ्र पता लगाने और लोगों को समय रहते सतर्क करने के लिए पृथ्वी कंपन पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत कई सेंसर लगाए गए हैं। बजट सत्र के चौथे दिन गैरसैंण में हुई कार्यवाही के दौरान सरकार ने बताया कि अभी तक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 169 सेंसर स्थापित किए जा चुके हैं, जो भूकंप के संकेतों को पहचानने और प्रारंभिक चेतावनी देने में सहायता करते हैं।
वर्तमान में 128 सेंसर सक्रिय
संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने विधानसभा में बताया कि फिलहाल लगाए गए सेंसरों में से 128 सेंसर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जबकि 41 सेंसर अस्थायी रूप से बंद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी मरम्मत और रखरखाव की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, इसलिए समय-समय पर कार्यरत सेंसरों की संख्या में बदलाव होता रहता है। सरकार का कहना है कि इन सेंसरों की मरम्मत और तकनीकी सुधार नियमित रूप से किए जाते हैं।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से आती हैं चुनौतिया
उत्तराखंड का पहाड़ी और दुर्गम भूभाग इस परियोजना के संचालन में कई चुनौतियां पैदा करता है। कई सेंसर दूरस्थ स्थानों पर स्थापित किए गए हैं, जहां बिजली आपूर्ति बाधित होने पर संकेतों का प्रसारण प्रभावित हो सकता है। सरकार ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ सेंसर अस्थायी रूप से ऑफलाइन हो जाते हैं, हालांकि उन्हें जल्द से जल्द फिर से चालू करने के प्रयास किए जाते हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था की भी व्यवस्था
विधानसभा में इस विषय पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि सेंसरों को लगातार सक्रिय बनाए रखने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजली बाधित होने की स्थिति में भी चेतावनी प्रणाली काम करती रहे और लोगों को समय पर सूचना मिल सके।
तकनीकी सहयोग से मजबूत हो रही प्रणाली
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि इस पूरी प्रणाली के तकनीकी संचालन और निगरानी में रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की विशेषज्ञ टीम लगातार काम कर रही है। यह टीम सेंसरों से जुड़े तकनीकी मुद्दों को सुलझाने और चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
भविष्य में और मजबूत होगा चेतावनी नेटवर्क
राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले समय में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक व्यापक बनाया जाए। इसके तहत सेंसरों की संख्या बढ़ाकर लगभग 500 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसरों का यह विस्तृत नेटवर्क भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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