उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य समाज में समरसता और एकता की भावना को सुदृढ़ करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक परंपराएं समाज को नैतिक और सांस्कृतिक आधार प्रदान करती हैं, जिससे सामूहिक जीवन में संतुलन और सद्भाव कायम रहता है। उन्होंने कहा कि जब धर्म को सही दृष्टिकोण से समझा जाता है, तब वह समाज को जोड़ने की शक्ति बनता है और लोगों को एक साझा सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है।
जातिवाद से सामाजिक संरचना होती है कमजोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में जाति की अवधारणा मूलतः समाज के संगठन और कार्य विभाजन की व्यवस्था के रूप में विकसित हुई थी, लेकिन जब यह जातिवाद का रूप ले लेती है तो समाज की एकता को कमजोर कर देती है। उनके अनुसार जातिवाद समाज में विभाजन और अविश्वास की भावना को जन्म देता है, जिससे राष्ट्रीय एकता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी सामाजिक समरसता और पारस्परिक विश्वास में निहित होती है।
पूर्व की नीतियों से बढ़े कई सामाजिक संकट
योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों ने समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित करने की राजनीति को बढ़ावा दिया। उनके अनुसार इस प्रकार की राजनीति के कारण देश को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें कश्मीर में अशांति, नक्सलवाद, भाषाई विवाद और जातीय संघर्ष जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों ने राष्ट्रीय एकता और विकास की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मजबूत हुआ राष्ट्रीय आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नेतृत्व ने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और कश्मीर तथा नक्सलवाद जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में निर्णायक पहल की गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।
विकास और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान शासन में देशभर में आधारभूत संरचना के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले सड़कें और परिवहन सुविधाएं नहीं थीं, वहां अब सुदृढ़ मार्गों का निर्माण किया गया है। रेल संपर्क का विस्तार हुआ है और कई स्थानों पर हवाई अड्डे, मेट्रो सेवाएं, चिकित्सा संस्थान तथा अभियांत्रिकी महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं। इससे विकास की प्रक्रिया को व्यापक आधार मिला है और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
आध्यात्मिक परंपराओं के पुनर्जागरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को कभी-कभी पिछड़ेपन के दृष्टिकोण से देखा, जबकि वर्तमान नेतृत्व ने यह स्वीकार किया है कि देश की सांस्कृतिक चेतना और आस्था का आधार सनातन परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति केवल भौतिक विकास से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से भी संभव होती है।
आस्था स्थलों के विकास से बढ़ा सांस्कृतिक गौरव
योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश की आस्था, संकल्प और एकता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि पहले जहां सीमित संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर पाते थे, अब वहां हजारों लोग एक साथ दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने मथुरा और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों में हुए विकास कार्यों की भी चर्चा की और कहा कि भारत का आत्मबल ऋषि-मुनियों की साधना, वीर योद्धाओं के पराक्रम, किसानों की मेहनत और श्रमिकों के परिश्रम से सुदृढ़ हुआ है।
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