कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों में एक साथ अंतरिम रक्षाकवच (Blanket Protection) देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले की प्रकृति अलग होती है और सभी मामलों में एक समान सुरक्षा देने से जांच प्रभावित हो सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
सभी मामलों में रक्षाकवच की मांग
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पश्चिम बंगाल के विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज हैं। फिलहाल उन्हें केवल डीजे टिप्पणी मामले में अंतरिम रक्षाकवच मिला हुआ है, जबकि बाकी मामलों में भी समान सुरक्षा की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
अदालत ने उठाए अहम सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पूछा कि जब एक मामले में पहले से रक्षाकवच दिया जा चुका है, तो सभी मामलों में अलग से व्यापक संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? अदालत ने कहा कि प्रत्येक शिकायत और उसके तथ्य अलग-अलग हैं। ऐसे में सभी मामलों में एक साथ रक्षाकवच देना न्यायसंगत नहीं होगा और इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
शिलिगुड़ी और भवानीपुर मामलों का दिया उदाहरण
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिलिगुड़ी और भवानीपुर जैसे मामलों के आरोप अलग-अलग हैं। इसलिए सभी मामलों को एक समान मानकर एक ही आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि हर मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का जिक्र करने पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने राज्य की मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता का उदाहरण देते हुए दलील रखी। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अन्य नेताओं के मामलों की तुलना इस मामले से नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सभी मामलों में एक साथ व्यापक संरक्षण नहीं दिया गया था, बल्कि अलग-अलग मामलों में अलग-अलग राहत मिली थी।
राज्य सरकार ने मांगा समय
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता **एस. वी. राजू** ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। अदालत ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई तय की।
फिलहाल क्या राहत मिली?
हालांकि हाई कोर्ट ने सभी मामलों में रक्षाकवच देने से इनकार कर दिया, लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई से पहले अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है, तो वह तत्काल अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित कर सकते हैं। इससे उन्हें सीमित स्तर की कानूनी राहत का विकल्प खुला रहेगा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में आठ मामले दर्ज हैं। इनमें डीजे टिप्पणी से जुड़े मामले में उन्हें पहले ही अंतरिम रक्षाकवच मिल चुका है। बाकी मामलों में भी इसी तरह की सुरक्षा की मांग को लेकर उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।