पश्चिम बंगाल : की दो बेहद चर्चित विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजीनगर—में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर सिंबल और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर चल रही कानूनी व सांगठनिक खींचतान के बीच रविवार शाम ममता बनर्जी की अगुवाई वाली 'कालीघाट तृणमूल' ने अपने उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी। पार्टी ने नंदीग्राम से पूर्व पंचायत समिति कर्माध्यक्ष संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही असम की नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए टीएमसी ने अब्दुल सलाम को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
नंदीग्राम से संचिता प्रधान पर दांव, ममता नहीं लड़ेंगी चुनाव
नंदीग्राम सीट को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे कि खुद ममता बनर्जी इस सीट से मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि, सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी ने स्थानीय चेहरा संचिता प्रधान (डे) के नाम पर मुहर लगाई। संचिता प्राथमिक स्कूल की पूर्व शिक्षिका हैं और बोयाल-2 ग्राम पंचायत की निवासी हैं। वर्ष 2022 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2014 प्राथमिक टेट भर्ती मामले के तहत जिन 269 शिक्षकों की नौकरी रद्द हुई थी, उनमें संचिता का नाम भी शामिल था। इससे पहले पिछले चुनाव में भी तृणमूल ने बोयाल-2 के पूर्व प्रधान पवित्र कर को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था। वरिष्ठ नेता अखिल गिरि को इस सीट पर चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
रेजीनगर में रबीउल बनाम हुमायूं कबीर का खेमा
रेजीनगर विधानसभा सीट से कालीघाट तृणमूल ने रबीउल आलम चौधरी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। रेजीनगर सीट 'आम जनता उन्नयन पार्टी' के संस्थापक हुमायूं कबीर द्वारा सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है। हुमायूं कबीर ने दो सीटों से चुनाव जीता था और बाद में नौदा सीट को अपने पास रखते हुए रेजीनगर से इस्तीफा दे दिया था, जहां से अब उनके बेटे चुनाव मैदान में हैं। उम्मीदवार बनाए जाने के बाद रबीउल आलम चौधरी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के संविधान के मुताबिक ममता बनर्जी ही पार्टी की सर्वोच्च नेता हैं और असली प्रतीक (सिंबल) देने का अधिकार सिर्फ उन्हीं के पास है।
प्रतीक विवाद के बीच चुनाव आयोग में सुनवाई जारी
यह प्रत्याशी घोषणा ऐसे समय में हुई है जब तृणमूल कांग्रेस में दो फाड़ हो चुके हैं। कालीघाट खेमे और ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही तृणमूल खेमे के बीच पार्टी के नाम और 'जोड़ा घास फूल' (दो फूल और घास) चुनावी प्रतीक को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष विवाद चल रहा है। शनिवार को ही चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और दस्तावेजों की जांच की है। इस स्थिति के बीच जहां कांग्रेस और वामदलों (लेफ्ट) ने अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए हैं, वहीं ऋतव्रत बनर्जी के खेमे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
विपक्ष का हमला: '50 हजार वोटों से जीतेगी बीजेपी'
कालीघाट तृणमूल द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के तुरंत बाद विपक्षी खेमों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। ऋतव्रत समर्थक तृणमूल विधायक मदन मित्रा ने नंदीग्राम उम्मीदवार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने संचिता कोई चुनौती ही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार इस बार 50 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछले चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी थी, इसी वजह से यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।