कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रकृति के बदलते मिजाज ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इस साल 'सुपर एल नीनो' (Super El Nino) के प्रभाव के कारण मौसम चक्र में बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है। इसी के मद्देनजर संभावित प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ जैसी स्थितियों से निपटने के लिए राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने निर्देश जारी किया है कि आपात स्थिति या बाढ़ आने पर राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को अस्थायी राहत शिविरों (আশ্রয়কেন্দ্র) के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा कमिश्नर द्वारा 7 जुलाई को जारी इस आधिकारिक आदेश को राज्य के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DI - प्राथमिक और माध्यमिक) को भेज दिया गया है। निर्देश के मुताबिक, जिला प्रशासन के साथ उचित समन्वय बनाकर स्कूल भवनों और उनके बुनियादी ढांचे को प्रभावित लोगों के आश्रय के लिए तैयार रखना होगा। बता दें कि यह फैसला बीते 23 मई को नबन्ना (राज्य सचिवालय) में हुई मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक में लिया गया था, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
बाढ़ के साथ-साथ 'हीटवेव' से बचाव की भी तैयारी
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने सिर्फ भारी बारिश या बाढ़ ही नहीं, बल्कि बदलते मौसम में होने वाली भीषण तपिश और लू (Heatwave) को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है कि अत्यधिक गर्मी या हीटवेव की स्थिति में खुले मैदान में शारीरिक व्यायाम (PT) या खेलकूद की गतिविधियों को पूरी तरह से बंद रखा जाए। साथ ही, लू से बचने के उपायों का स्कूलों में व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।
छात्रों और आम लोगों के लिए शिक्षा विभाग की 'क्या करें और क्या न करें' (Do's & Don'ts) गाइडलाइंस:
क्या करें:
गर्मी के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।
धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या सनग्लासेस (धूप का चश्मा) का इस्तेमाल जरूर करें।
यात्रा के दौरान हमेशा पीने के पानी की बोतल साथ रखें।
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ओआरएस (ORS), नींबू पानी, लस्सी, छाछ या घोल जैसे पेय पदार्थों का सेवन करें।
तबीयत थोड़ी भी खराब लगने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
क्या न करें:
दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच, जब धूप सबसे तीखी होती है, बिना वजह बाहर निकलने से बचें।
तेज धूप और उच्च तापमान में अत्यधिक शारीरिक परिश्रम वाले काम न करें।
चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स और शराब के सेवन से परहेज करें, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
बासी भोजन या अत्यधिक प्रोटीन युक्त भारी खाना खाने से बचें।
किसी भी परिस्थिति में बच्चों या पालतू जानवरों को बंद या पार्क की गई कार के अंदर छोड़कर न जाएं।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि हीट स्ट्रोक और लू से होने वाली बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। सभी शिक्षण संस्थानों को आदेश दिया गया है कि वे इन नियमों को नोटिस बोर्ड और प्रार्थना सभाओं के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाएं ताकि किसी भी अप्रत्याशित आपदा से समय रहते निपटा जा सके।