कोलकाता: पश्चिम बंगाल के 2016 स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) भर्ती मामले में सेवा गंवाने वाले शिक्षकों, शिक्षिकाओं और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने सोमवार को सॉल्टलेक में फिर प्रदर्शन किया। विभिन्न संगठनों और मंचों के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने करुणामयी बस स्टैंड से विकास भवन तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया के बीच ऐसे अभ्यर्थी भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें वे ‘योग्य’ बताते हैं। उनका आरोप है कि योग्य और कथित तौर पर दागी अभ्यर्थियों के बीच अंतर किए बिना कार्रवाई होने से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी और आजीविका प्रभावित हुई है।
करुणामयी से विकास भवन तक निकला मार्च
सोमवार सुबह से ही राज्य के अलग-अलग जिलों से शिक्षक और शिक्षिकाएं करुणामयी में जुटने लगे। हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने विकास भवन की ओर मार्च किया। प्रदर्शन को देखते हुए बिधाननगर पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी। आंदोलनकारी प्रतिनिधि रूपा कर्मकार ने कहा कि उनका आंदोलन केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग करते हुए कहा कि सरकार को उन अभ्यर्थियों की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, जिन्हें आंदोलनकारी ‘योग्य’ मानते हैं। कर्मकार ने दावा किया कि आंदोलन से जुड़े कई शिक्षक मानसिक दबाव और अवसाद के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए मृतकों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।
8 सितंबर की क्यूरेटिव याचिका पर नजर
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग सुप्रीम कोर्ट में लंबित क्यूरेटिव याचिका की सुनवाई से जुड़ी है। उनका कहना है कि अदालत के सामने योग्य अभ्यर्थियों से संबंधित तथ्य और दस्तावेज प्रभावी तरीके से रखे जाने चाहिए। शिक्षक प्रतिनिधि चिन्मय मंडल ने मांग की कि राज्य सरकार और केंद्र की ओर से वरिष्ठ कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से तथ्य आधारित पक्ष रखा जाए और मामले की ओपन कोर्ट में सुनवाई का रास्ता तलाशा जाए। उनका कहना है कि इससे योग्य अभ्यर्थियों के मामले पर अदालत के सामने विस्तृत तरीके से दलील रखने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की मांग नए अभ्यर्थियों या ‘फ्रेशर्स’ के खिलाफ नहीं है। उनके अनुसार, विवाद की जड़ भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और उसके बाद पैदा हुई स्थिति है।
ग्रुप-C और ग्रुप-D कर्मचारियों ने भी उठाई आवाज
प्रदर्शन में शिक्षकों के अलावा ग्रुप-C और ग्रुप-D के गैर-शिक्षण कर्मचारी भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है और इसके कारण उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि दुर्गा पूजा से पहले परिवारों पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से नौकरी और वेतन से जुड़े मामलों में जल्द समाधान निकालने की मांग की।
मृत आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले अपने साथियों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग भी दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की मांग की, जिन्हें वे योग्य लेकिन अब तक नियुक्ति से वंचित बताते हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार और प्रशासन के सामने रख रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की ओर से ठोस बातचीत शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा।