कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत 300 मतुआ शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र सौंपे गए। वर्षों से पहचान और नागरिक अधिकारों का इंतजार कर रहे इन परिवारों के लिए यह दिन खास रहा। प्रमाणपत्र मिलने के बाद लाभार्थियों ने इसे अपने जीवन की नई शुरुआत बताया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों पर साधा निशाना
नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि CAA को लेकर लोगों के बीच जानबूझकर भ्रम फैलाया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कानून किसी भारतीय की नागरिकता खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न झेलकर भारत आए पात्र शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक नागरिकता देने के लिए बनाया गया है।
मतुआ समाज के लिए भावनात्मक पल
मतुआ समुदाय लंबे समय से भारतीय नागरिकता की मांग कर रहा था। नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद कई परिवारों ने खुशी जताते हुए कहा कि अब उन्हें कानूनी पहचान मिलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और अन्य संवैधानिक अधिकारों का लाभ भी आसानी से मिल सकेगा।
लंबित आवेदनों पर भी तेज होगी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि CAA के तहत जिन पात्र लोगों के आवेदन अभी लंबित हैं, उनकी प्रक्रिया भी तेज गति से पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सभी योग्य आवेदकों को निर्धारित समय के भीतर नागरिकता प्रदान की जाए, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान हो सके।
राजनीतिक बहस फिर हुई तेज
300 लोगों को नागरिकता मिलने के बाद एक बार फिर CAA पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जहां भाजपा इसे शरणार्थियों के साथ न्याय बता रही है, वहीं विपक्ष पहले की तरह इस कानून पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।