कोलकाता: कोलकाता के चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब घायलों के इलाज को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कोलकाता मेडिकल कॉलेज के इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों ने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में गंभीर कमियों का आरोप लगाया है। डॉक्टरों के मुताबिक, हादसे के बाद अस्पताल में जरूरी दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और आपातकालीन सुविधाओं की कमी सामने आई। इस मामले में घायलों को निजी अस्पताल अपोलो भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
करीब 18 लोगों को मृत अवस्था में लाए जाने का दावा
जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न के मुताबिक, चोरबागान हादसे के बाद करीब 18 लोगों को मृत अवस्था में कोलकाता मेडिकल कॉलेज लाया गया था। वहीं, अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर चुके सात से आठ घायल मरीजों को कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अपोलो अस्पताल भेज दिया गया। डॉक्टरों ने इस फैसले और सरकारी अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
जरूरी दवाओं और जांच सुविधाओं की कमी का आरोप
डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद घायलों के उपचार के दौरान जरूरी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी महसूस हुई। इसके अलावा, एबीजी (आर्टेरियल ब्लड गैस) जांच में भी बाधा आने की बात कही गई। आपातकालीन स्थिति में इस तरह की जांच और चिकित्सा सुविधाओं का सुचारु रूप से उपलब्ध होना बेहद जरूरी माना जाता है। डॉक्टरों ने अस्पताल की तैयारियों और संसाधनों को लेकर चिंता जताई है।
ट्रॉमा और न्यूरोसर्जरी सुविधाओं पर भी उठे सवाल
जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल में पर्याप्त ट्रॉमा केयर और आपातकालीन न्यूरोसर्जरी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं होनी चाहिए। इस घटना के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की मांग तेज हुई है।
पीड़ित परिवारों ने भी पुलिस पर लगाए आरोप
हादसे में अपनों को खोने वाले कुछ परिवारों ने पुलिस से अपेक्षित सहायता नहीं मिलने की शिकायत की है। घटना के बाद परिजनों को अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता प्राप्त करने में परेशानी होने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की मांग
चोरबागान हादसे के बाद जूनियर डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, आपातकालीन सेवाओं और जरूरी चिकित्सा संसाधनों में तत्काल सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि बड़े हादसों के दौरान मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं, जांच उपकरण, ट्रॉमा केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब इन आरोपों और अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर नजर रहेगी।