कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने जहाँ एक ओर सत्ता परिवर्तन की कहानी लिखी, वहीं दूसरी ओर वामपंथ के लिए 'संजीवनी' का काम किया है। पिछले कई चुनावों से लगातार 'शून्य' का दंश झेल रही माकपा (CPIM) ने आखिरकार इस बार मुर्शिदाबाद की मिट्टी से अपनी वापसी दर्ज की है। 2016 के बाद पहली बार विधानसभा में लाल झंडा लहराएगा।
मुस्तफिजुर रहमान ने काटा 'शून्य' का फाँस
मुर्शिदाबाद की डोमकल विधानसभा सीट पर हुए चतुष्कोणीय मुकाबले में माकपा के उम्मीदवार और 'मास्टरमशाय' के नाम से प्रसिद्ध मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान (राना) ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर और कांग्रेस की शहनाज़ बेगम को 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया। मुस्तफिजुर पेशे से शिक्षक रहे हैं और एसएफआई (SFI) के दौर से ही एक कुशल संगठक माने जाते हैं।
अलीमुद्दीन स्ट्रीट का नया समीकरण
माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने इस जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हालांकि कांग्रेस के साथ गठबंधन न होने और वोट कटने के कारण मालदा और मुर्शिदाबाद में कुछ सीटें हाथ से निकल गईं, लेकिन 'दो फूलों' (TMC और BJP) की बाइनरी अब खत्म हो रही है।
ISF की जीत: माकपा के गठबंधन सहयोगी आईएसएफ (ISF) के नौशाद सिद्दीकी ने भांगड़ सीट से अपनी जीत बरकरार रखी है।
दूसरे स्थान पर पकड़: माकपा और आईएसएफ करीब 12 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे हैं, जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं।
जीत के साथ ही टकराव के आसार
चुनाव परिणाम आते ही दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में तनाव की स्थिति देखी गई। यहाँ 8-बी स्टैंड पर स्थित लेनिन की मूर्ति पर कालिख पोतने का आरोप लगा। सूचना मिलते ही सृजन भट्टाचार्य के नेतृत्व में माकपा कार्यकर्ताओं ने वहां पहुँचकर सफाई की। सुजन चक्रवर्ती ने इसे 'भाजपा द्वारा तृणमूल की संस्कृति को अपनाने' जैसा करार दिया और चेतावनी दी कि वामपंथी ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।भले ही वामपंथियों का वोट शेयर अभी भी 5% के आसपास सिमटा है, लेकिन सदन में उनकी उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।