कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार अब हुगली नदी के किनारे बसे ऐतिहासिक यूरोपीय विरासत वाले शहरों को जोड़कर एक नए पर्यटन सर्किट विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस पहल के तहत उन क्षेत्रों को एक ही पर्यटन मानचित्र पर लाने की योजना है, जहां कभी पुर्तगाली, डच, डेनिश और फ्रांसीसी उपनिवेशों का प्रभाव रहा था।
राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य हुगली जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नए तरीके से पर्यटन के साथ जोड़ना है। खासतौर पर यूरोपीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस सर्किट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
पुर्तगाली से फ्रांसीसी विरासत तक, एक सर्किट में जुड़ेंगे ऐतिहासिक शहर
प्रस्तावित पर्यटन सर्किट में बांसबेड़िया और बैंडेल की पुर्तगाली विरासत, चुंचुड़ा की डच कॉलोनी, श्रीरामपुर की डेनिश विरासत और चंदननगर की फ्रांसीसी पहचान को शामिल करने की योजना है। इन सभी ऐतिहासिक क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर पर्यटकों के लिए एक अलग अनुभव तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
हुगली नदी के किनारे बसे इन शहरों की वास्तुकला, ऐतिहासिक इमारतें और यूरोपीय संस्कृति से जुड़ी विरासत लंबे समय से इस क्षेत्र की खास पहचान रही है।
जलमार्ग से ऐतिहासिक शहरों की सैर की तैयारी
इस परियोजना का एक अहम हिस्सा हुगली नदी को केंद्र में रखकर जलमार्ग आधारित पर्यटन को विकसित करना भी है। योजना के तहत पर्यटकों को जलमार्ग के जरिए एक के बाद एक ऐतिहासिक शहरों की यात्रा करने का अवसर मिल सकता है।
इससे पर्यटक सड़क मार्ग के साथ-साथ नदी के रास्ते भी हुगली की यूरोपीय विरासत से जुड़े विभिन्न शहरों को करीब से देख सकेंगे। सरकार इस पूरे क्षेत्र को एक आकर्षक और व्यवस्थित पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना चाहती है।
फ्रांसीसी निवेश कोलकाता लाने पर भी जोर
फ्रांस के प्रतिनिधि थियरी मैथ्यू ने नई सरकार के गठन पर सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से रुके हुए सुधारों को नई सरकार ने सत्ता में आने के कुछ महीनों के भीतर लागू किया है।
उन्होंने कहा कि भारत में फ्रांसीसी निवेश का प्रमुख केंद्र अब तक मुख्य रूप से मुंबई रहा है, लेकिन अब कोशिश रहेगी कि फ्रांसीसी निवेश कोलकाता और पश्चिम बंगाल तक भी पहुंचे। उन्होंने जरूरत पड़ने पर कोलकाता से फ्रांस के लिए सीधी हवाई सेवा शुरू करने की संभावना का भी उल्लेख किया।
वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर हुगली को नई पहचान देने की कोशिश
हुगली के ऐतिहासिक शहरों, यूरोपीय वास्तुकला और नदी पर्यटन को एक साथ जोड़कर राज्य सरकार इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना चाहती है। माना जा रहा है कि इस पहल से न केवल विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिल सकती है।