कोलकाता: तारातला हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने बहुमंजिला और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निर्माणाधीन हाईराइज इमारतों की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
31 जुलाई तक पूरा होगा स्पेशल ऑडिट
सरकार के निर्देश के अनुसार, 31 जुलाई तक कोलकाता समेत कई नगर क्षेत्रों में निर्माणाधीन बहुमंजिला और कमर्शियल भवनों का विशेष ऑडिट किया जाएगा। इस दौरान भवन निर्माण की गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा मानकों की विस्तार से जांच होगी।
तीन और नगर क्षेत्र ऑडिट के दायरे में शामिल
पहले यह अभियान कोलकाता, राजारहाट-न्यू टाउन, सोनारपुर और बजबज तक सीमित था। अब इसे विस्तार देते हुए दक्षिण दमदम, बरानगर और कमारहाटी नगर क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया गया है। इससे महानगर और उसके आसपास के इलाकों में निगरानी और मजबूत होगी।
ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
जांच में अगर किसी भवन में गंभीर अनियमितता या सुरक्षा संबंधी खामी मिलती है तो उसकी अनुमति रद्द की जा सकती है। वहीं, मामूली कमियां मिलने पर उन्हें निर्धारित समय में दूर करने का निर्देश दिया जाएगा। सभी मानकों का पालन करने वाले भवनों को ही अंतिम मंजूरी मिलेगी।
फायर सेफ्टी और लाइटनिंग सिस्टम की भी होगी जांच
सरकार ने अगले 90 दिनों के भीतर सभी हाईराइज इमारतों के फायर सेफ्टी सिस्टम और लाइटनिंग अरेस्टर की तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना है।
G+5 या उससे ऊंची इमारतें होंगी ऑडिट के दायरे में
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राउंड प्लस पांच मंजिल (G+5) या उससे ऊंची इमारतों को ही हाईराइज श्रेणी में रखा जाएगा। सामान्य मकानों की मरम्मत या छोटे स्तर के विस्तार कार्य इस विशेष ऑडिट अभियान का हिस्सा नहीं होंगे।
सरकार का संदेश—विकास भी, सुरक्षा भी
सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य निर्माण गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बहुमंजिला इमारत सुरक्षा मानकों का पालन करे। प्रशासन का मानना है कि मजबूत निगरानी से भविष्य में बड़े हादसों की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।