पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समाज के करम पर्व के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कुड़माली भाषा को लेकर बड़ा आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सरकार पहल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजबंशी भाषा को भी अष्टम अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
लंबे समय से उठ रही है मांग
कुड़माली भाषा को अष्टम अनुसूची में शामिल करने की मांग कुड़मी समाज की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख मांगों में शामिल है। पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड, ओडिशा और बिहार के कई हिस्सों में कुड़माली बोलने वाले लोग रहते हैं। इस मांग को लेकर अलग-अलग समय पर आंदोलन और सरकार के स्तर पर पहल भी होती रही है।
करम पर्व में पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी रविवार को पुरुलिया के कराडी मैदान में आयोजित कुड़मी समाज के करम पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू प्रमुख सुदेश महतो समेत कुड़मी समाज के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान करम वृक्ष के रोपण में भी हिस्सा लिया।
‘जल्द शुरू होगी प्रक्रिया’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुड़माली भाषा को अष्टम अनुसूची में जगह दिलाने की मांग का सरकार समर्थन करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कुड़माली के साथ राजबंशी भाषा को भी अष्टम अनुसूची में शामिल कराने की बात कही।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को अष्टम अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा इससे पहले भी केंद्र सरकार के सामने उठाया जा चुका है। फरवरी 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने दोनों भाषाओं को अष्टम अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को पत्र भेजने की जानकारी दी थी।
वहीं, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के संकल्प पत्र में भी कुड़माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल करने का वादा किया गया था।
अष्टम अनुसूची में अभी 22 भाषाएं
भारत के संविधान की अष्टम अनुसूची में फिलहाल 22 भाषाएं शामिल हैं। इनमें हिंदी, बंगाली, असमिया, उड़िया, संस्कृत, मराठी, तमिल, तेलुगु, उर्दू और संताली समेत अन्य भाषाएं शामिल हैं। कुड़माली अभी इस सूची का हिस्सा नहीं है।
कुड़मी समाज से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी आश्वासन
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कुड़मी समाज से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार के रुख की जानकारी दी। उन्होंने कुड़मियों के आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया। साथ ही पश्चिमी क्षेत्र के विकास के लिए आवंटित राशि खर्च करने और कुड़मी विकास बोर्ड को फिर से सक्रिय करने की बात भी कही।