महेशतला: दक्षिण 24 परगना के रवींद्रनगर थाना क्षेत्र में श्रीमती मालती बिस्वास के बाएं पैर के घुटने के ऊपर से किए गए विच्छेदन मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता और मालती बिस्वास के पति प्रबीर कुमार बिस्वास ने थाना प्रभारी को पत्र देकर FIR दर्ज करने, जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पति ने लगाए गंभीर आरोप, जांच के लिए पुलिस से हस्तक्षेप की मांग
शिकायत में प्रबीर कुमार बिस्वास ने बताया कि उनकी पत्नी को इलाज से जुड़े घटनाक्रम के बाद अपना बायां पैर गंवाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी को 75 प्रतिशत स्थायी शारीरिक दिव्यांगता प्रमाणित की गई है। शिकायतकर्ता ने मामले में संभावित संज्ञेय अपराधों की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत करने का अनुरोध किया है।
अलोक संघ क्लब में लगे चिकित्सा शिविर से जुड़ा मामला
शिकायत के अनुसार, मामले की शुरुआत महेशतला नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 स्थित अकड़ा नटुनपोल के अलोक संघ क्लब में आयोजित एक सार्वजनिक चिकित्सा शिविर से हुई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी शिविर में प्रारंभिक चिकित्सा परामर्श दिया गया था, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती, सर्जरी और अंत में पैर काटने की स्थिति सामने आई।
रिकॉर्ड और दस्तावेज सुरक्षित रखने की अपील
प्रबीर कुमार बिस्वास ने पुलिस से चिकित्सा शिविर के रिकॉर्ड, कर्मचारियों की ड्यूटी सूची और संबंधित व्यक्तियों की जानकारी सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि ये दस्तावेज निजी तौर पर हासिल करना संभव नहीं है, इसलिए पुलिस जांच के जरिए इन्हें सुरक्षित किया जाना जरूरी है।
पहले से चलने-फिरने में सक्षम थीं मालती बिस्वास
शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2025 से पहले मालती बिस्वास ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटने के दर्द से परेशान थीं, लेकिन परिवार के अनुसार वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम थीं। शिकायतकर्ता ने इलाज की प्रक्रिया और उसके बाद हुई घटनाओं की विस्तृत जांच की मांग की है।
11 लोगों के खिलाफ शिकायत का दावा
मामले को लेकर जारी बयान में दावा किया गया है कि रवींद्रनगर थाने में भाईपो और उसके कथित सहयोगियों समेत 11 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। बयान में महेशतला के गोपाल साहा का भी नाम लिया गया है और आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग उनके साथ समझौते कर रहे थे। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।