कोलकाता: पश्चिम बंगाल में संगठित साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने राज्यव्यापी कार्रवाई तेज कर दी है। साइबर क्राइम विंग (CCW) और S4C यूनिट ने खुफिया इनपुट के आधार पर सात दिनों तक चलाए गए 'ऑपरेशन साइबर प्रहार' के दौरान कथित ऑनलाइन ठगी नेटवर्क पर शिकंजा कसा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियान के दौरान 69 एफआईआर दर्ज की गईं और 107 संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल अरेस्ट और टेक्निकल सपोर्ट स्कैम से जुड़े ढांचे पर भी कार्रवाई की।
107 गिरफ्तारियां, 3 अवैध कॉल सेंटर बंद
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 107 आरोपियों में से 40 को बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र से पकड़ा गया। बाकी गिरफ्तारियां कोलकाता पुलिस क्षेत्र और राज्य के अन्य हिस्सों में की गई छापेमारी के दौरान हुईं। अभियान में पुलिस ने तीन कथित अवैध कॉल सेंटरों का भी पता लगाया, जहां फर्जी कॉल और टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर लोगों से ठगी किए जाने का आरोप है। इसके अलावा जालसाजी में इस्तेमाल किए जा रहे 400 से अधिक संदिग्ध सिम कार्डों को डिएक्टिवेट कराया गया है।
सिर्फ जालसाज नहीं, पूरे वित्तीय नेटवर्क पर नजर
साइबर पुलिस की कार्रवाई केवल कथित कॉलर्स और ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रही। जांच एजेंसियां ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कथित म्यूल बैंक खातों की भी पहचान कर रही हैं। पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने के साथ-साथ ऐसे ATM, बैंक शाखाओं और POS मशीनों की भी जांच शुरू की है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध रकम निकालने या ट्रांसफर करने में किया गया।
जामताड़ा नेटवर्क और बंगाल के हॉटस्पॉट्स पर कार्रवाई
ऑपरेशन के दौरान झारखंड सीमा से लगे उन इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया, जिन्हें साइबर अपराध के संभावित हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया है। बीरभूम, आसनसोल, हुगली, चंदननगर और पूर्व एवं पश्चिम बर्दवान में भी पुलिस टीमों ने कार्रवाई की। इन क्षेत्रों में कथित तौर पर जामताड़ा से जुड़े साइबर अपराध नेटवर्क के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई थी।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें शिकायत
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर शिकायत करने में बिल्कुल देरी न करें।
- तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तुरंत सूचना देकर संदिग्ध लेनदेन को रोकने का प्रयास करें।
- ठगी से जुड़े मोबाइल नंबर, मैसेज, लिंक और ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को संबंधित बैंक खातों में रोकने या फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है। अभियान के तहत सामने आए कथित नेटवर्क की आगे भी जांच जारी है।