पश्चिम बंगाल के कूच विहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने जहां एक ओर महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
सभी दल मिलकर इसे सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा कानून किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर पहले भी विभिन्न दलों से चर्चा की जा चुकी है और अब समय आ गया है कि सभी दल मिलकर इसे सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं। उन्होंने विशेष रूप से देश की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे राजनीतिक दलों पर दबाव बनाएं ताकि संसद में इस कानून को खुले मन से समर्थन मिल सके।
पीएम मोदी ने टीएमसी के घोषणापत्र पर सवाल उठाए
अपने भाषण के दौरान मोदी ने टीएमसी के हाल ही में जारी घोषणापत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र को ‘इश्तेहार’ नाम देना बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ छेड़छाड़ जैसा है। उन्होंने 1905 के ‘लाल इश्तेहार’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय मजहबी ताकतों ने समाज में विभाजन पैदा किया था और आज की राजनीति उसी दिशा की याद दिलाती है।
राजनीति को समाप्त करने का समय आ गया
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण बंगाल की पहचान और सम्मान को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इसे “घिनौना खेल” करार देते हुए दावा किया कि राज्य की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है और ऐसी राजनीति को समाप्त करने का समय आ गया है। कूच विहार की इस रैली में प्रधानमंत्री का भाषण आगामी राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।