ओडिशा - खेल की दुनिया में एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया और प्रेरित भी किया। ओडिशा की 18 वर्षीय पैरालिंपिक तीरंदाज पायल नाग ने वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता शीतल देवी को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। पायल की कहानी न केवल खेल की बल्कि संघर्ष और जज्बे की भी मिसाल है। बिना हाथ और पैर होने के बावजूद, पायल ने अपनी मेहनत, समर्पण और अदम्य साहस से विश्व स्तर पर अपना परचम लहराया।
पायल तीरंदाजी में हैट्रिक लगायेगी
18 वर्षीय पैरालिंपिक तीरंदाज पायल नाग के कोच कुलदीप वेदवान ने कहा कि, पायल ने पिछले तीन साल में दो बार ओलंपिक पदक विजेता शीतल देवी को हराया है। उनके भीतर जो हौसला और आत्मविश्वास है, वह उन्हें अगले एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल दिला सकता है। मैं पूरी उम्मीद रखता हूँ कि पायल तीरंदाजी में हैट्रिक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन सकती हैं।
लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनी पायल
पैरालिंपिक तीरंदाज पायल नाग की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी दिखाती है कि शारीरिक सीमाएँ कभी किसी के सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकती। पायल नाग ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं होती। आज वे केवल एक विजेता नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं।