कोलकाता:पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जादवपुर विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया। हाल ही में कैंपस में हुए छात्र गुटों के संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार विश्वविद्यालय परिसर के भीतर और बाहर राष्ट्रवाद तथा 'वंदे मातरम' के सम्मान को स्थापित करने के अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगी।
"कैंपस में वंदे मातरम और तिरंगे का अपमान बर्दाश्त नहीं"
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक माहौल पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कैंपस के भीतर 'राष्ट्रविरोधी तत्व' सक्रिय हैं, जो 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि जादवपुर में राष्ट्रध्वज फहराने, 'वंदे मातरम' गाने और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने में बाधाएं उत्पन्न की जाती हैं, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को पूरा करने का संकल्प
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को पूरा करने और सनातन संस्कृति व राष्ट्रवाद की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मीडिया का एक हिस्सा भले ही राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन करे, लेकिन सरकार राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय प्रतीकों से कोई समझौता नहीं करेगी।
TMC और वामपंथी दलों पर साधा निशाना
विरोधी राजनीतिक दलों पर हमला बोलते हुए सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस को 'दिशाहीन' बताया। इसके साथ ही उन्होंने वामपंथी नेताओं (सीपीएम) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चुनावों में ज़मानत ज़ब्त कराने वाले दल राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं, लेकिन अब उनकी राजनीति सफल नहीं होने वाली है।तथ्यों और आधिकारिक चुनावी जानकारी के लिए आप Election Commission of India की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों को दिया आश्वासन
भवानीपुर में 'अन्नपूर्णा योजना' के लाभार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल 106 दिन पुरानी सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य का समग्र विकास करना है। उन्होंने दावा किया कि अगस्त महीने में 1.45 करोड़ महिलाओं को इस योजना की राशि मिल चुकी है और जल्द ही 20 से 22 लाख अतिरिक्त पात्र महिलाओं को इसके तहत जोड़ा जाएगा।
अपने राजनीतिक संघर्ष का किया जिक्र
अपने संबोधन के अंत में सुवेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर के कठिन दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि जब राज्य में सीपीएम अपने चरम पर थी, तब उन्होंने तमलुक में तत्कालीन कद्दावर नेता को भारी मतों के अंतर से हराया था। इसलिए किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या मीडिया ट्रायल से उनकी सरकार को डराया नहीं जा सकता।