भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों को सरकारी योजनाओं और कृषि से जुड़ी सुविधाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने एक नया अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि अब किसानों को अपनी पहचान और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। सरकार की कोशिश है कि सरकारी अमला खुद किसानों तक पहुंचे और उनकी फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया पूरी कराए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात 22 अगस्त को नई दिल्ली से शिवपुरी जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में वर्चुअली शामिल होते हुए कही। कार्यक्रम कृषि उपज मंडी पिपरसमा में आयोजित किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने, खाद की उपलब्धता, कृषि ऋण, सिंचाई, बिजली और खेती के साथ दूसरे आय के साधनों को अपनाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल किसानों को योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि खेती को अधिक लाभदायक बनाना भी है। इसके लिए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों से भी जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
किसानों के घर तक पहुंचेगा सरकारी अमला, फार्मर आईडी बनाने का अभियान शुरू
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए अभियान शुरू किया गया है। इसका मकसद किसानों को सरकारी प्रक्रियाओं में होने वाली अनावश्यक परेशानी से राहत देना है। उन्होंने कहा कि किसानों को फार्मर आईडी बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने या लंबी कतारों में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार की ओर से तैनात दल गांवों और किसानों तक पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे इस अभियान का लाभ उठाएं और अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवाएं। सरकार का मानना है कि किसानों की डिजिटल पहचान मजबूत होने से कृषि से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से उन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
खाद की चिंता दूर करने के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम व्यवस्था
किसानों को खाद की उपलब्धता और उसके लिए पैसों की जरूरत को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की नीति स्पष्ट की। डॉ. यादव ने कहा कि किसान को खाद खरीदने के लिए आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि आर्थिक कारणों से किसी किसान की खेती प्रभावित न हो। किसान समय पर खाद और दूसरी जरूरी कृषि सामग्री जुटा सके, इसके लिए व्यवस्थाओं को किसान हित में बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के माथे पर चिंता की लकीर नहीं देखना चाहती और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।
शिवपुरी की मूंगफली ने देशभर में बनाई पहचान
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने शिवपुरी के किसानों की मेहनत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले की मूंगफली ने अपनी गुणवत्ता और उत्पादन के कारण देशभर में पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि वे केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहें। खेती के साथ ऐसे क्षेत्रों को भी अपनाया जा सकता है, जिनसे परिवार की आमदनी के अतिरिक्त स्रोत तैयार हों। उन्होंने किसानों को बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों से जुड़ने की सलाह दी। उनका कहना था कि खेती के साथ इन गतिविधियों को जोड़ने से किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कृषि ऋण चुकाने में किसानों को राहत, 31 मार्च की समय-सीमा खत्म
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के ऋण से जुड़ी व्यवस्था में किए गए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को कृषि ऋण की राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर, यानी 31 मार्च तक जमा करनी होती थी। अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए 31 मार्च की निश्चित समय-सीमा से राहत दी गई है। अब किसान एक वर्ष के भीतर अपनी सुविधा के अनुसार ऋण चुका सकेंगे। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य किसानों पर एक निश्चित तारीख तक ऋण चुकाने का दबाव कम करना बताया गया है। इससे किसानों को अपनी फसल और आमदनी के हिसाब से भुगतान की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है।
ई-विकास 2.0 से खाद खरीदने की प्रक्रिया होगी आसान
मुख्यमंत्री ने ई-विकास प्रणाली में किए गए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ई-विकास प्रणाली को पहले की तुलना में अधिक सरल, सहज और किसान हितैषी बनाया गया है। ई-विकास 2.0 के माध्यम से किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा देने की बात कही गई। मुख्यमंत्री के अनुसार अब किसान अपनी आवश्यकता के मुताबिक किसी एक उर्वरक का चयन कर सकेगा और उसे किसी अनिवार्य संयोजन के साथ खरीदने की बाध्यता नहीं होगी। इस व्यवस्था से किसानों को खाद खरीदने के दौरान अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
खेती के साथ दूसरे व्यवसायों पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। कृषि के साथ कई दूसरे क्षेत्रों को जोड़कर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने होमस्टे की बढ़ती अवधारणा का भी उल्लेख किया। शिवपुरी जैसे पर्यटन की संभावनाओं वाले जिले में किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए यह आय का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकता है। शिवपुरी में माधव टाइगर रिजर्व भी है, जहां पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के विस्तार का लाभ स्थानीय लोगों और किसानों को भी मिल सकता है। इस तरह कृषि, पशुपालन, पर्यटन और अन्य ग्रामीण गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
दिन में मिलेगी बिजली, किसानों को रात में सिंचाई से राहत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए बिजली आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष चना और गन्ने की फसल लगाने वाले किसानों को पूरे समय दिन में बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में व्यवस्था की जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा सिंचाई के दौरान किसानों को मिलने वाली राहत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कई बार रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करनी पड़ती है। इससे उन्हें असुविधा के साथ सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रात में खेतों में सिंचाई के दौरान किसानों को करंट लगने और सांप के काटने जैसी घटनाओं का खतरा भी रहता है। दिन के समय बिजली उपलब्ध होने से किसानों को रातभर खेतों में जागकर सिंचाई करने की जरूरत कम होगी और खेती का काम भी अधिक सुविधाजनक तरीके से किया जा सकेगा।
बलराम कृषि महोत्सव को बताया किसानों के स्वाभिमान का पर्व
मुख्यमंत्री ने बलराम कृषि महोत्सव को किसानों के सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अन्नदाता के योगदान को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने शिवपुरी को नदियों और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र बताते हुए केन, बेतवा, पार्वती, सिंध और महुआ नदियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन जल संसाधनों के माध्यम से किसानों के खेतों को सिंचाई का आधार मिल रहा है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा शहीद तात्या टोपे को भी याद किया और शिवपुरी की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया।
किसान सम्मान निधि से हर साल मिल रहे 12 हजार रुपये
मुख्यमंत्री ने किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर वर्ष 12 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इस राशि का उपयोग किसान खेती की आवश्यकताओं के लिए कर सकते हैं। खाद, बीज और दूसरी जरूरी कृषि सामग्री की खरीद के समय मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। सरकार की ओर से किसान कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित में राशि की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।
रक्षाबंधन से पहले लाड़ली बहनों के खातों में पहुंची राशि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की लाड़ली बहनों को भी आगामी रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना की राशि रक्षाबंधन से पहले पात्र बहनों के बैंक खातों में भेजी गई है, ताकि वे त्योहार की तैयारियां और रक्षाबंधन का पर्व खुशी के साथ मना सकें। मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा।
शिवपुरी को कृषि क्षेत्र में आगे ले जाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि शिवपुरी जिले की कृषि क्षमता का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। जिले में खेती के साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी और पर्यटन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों से भी बदलते कृषि क्षेत्र के साथ अपनी गतिविधियों में विस्तार करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और सभी के सहयोग से शिवपुरी को कृषि के क्षेत्र में और मजबूत बनाया जाएगा।