लखनऊ - उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब और टैक्सी सेवाओं को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 के तहत अब 12 साल तक पुराने वाहनों का भी पंजीकरण कराया जा सकेगा। इससे पहले वाहनों की अधिकतम आयु सीमा आठ वर्ष निर्धारित थी। वाहन मालिकों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि शुरुआती वर्षों में वे बैंक का कर्ज चुकाने में ही लगे रहते हैं।
पैनिक बटन और ट्रैकिंग डिवाइस जरूरी
नई व्यवस्था के तहत ऐप से चलने वाले वाहनों में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा। इन्हें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) से भी जोड़ा जाएगा। परिवहन विभाग इन वाहनों की नियमित निगरानी करेगा। लखनऊ में फिलहाल 10 हजार से अधिक वाहन Ola, Uber, RedBus और InDrive जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित बताए जा रहे हैं। परिवहन विभाग के पोर्टल पर इन वाहनों का पंजीकरण शुरू हो गया है। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित वाहनों का वास्तविक रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध होगा।

10 मिनट में ड्राइवर नहीं पहुंचा तो राइड रद्द
नियमों के मुताबिक वाहन बुक करने के बाद यदि ड्राइवर 10 मिनट के भीतर रिपोर्ट नहीं करता, तो यात्री राइड रद्द कर सकता है। ऐसी स्थिति में ड्राइवर पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और यात्री को अगली बुकिंग में उतनी ही राशि तक राहत दी जाएगी। वहीं, यदि यात्री अपनी तरफ से बुकिंग रद्द करता है तो अधिकतम 10 प्रतिशत या 100 रुपये, जो भी कम हो, अगले बुकिंग किराए में वसूला जा सकेगा। इस कार्रवाई का विवरण ऐप और पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा।
कम से कम 3 किलोमीटर का किराया
नई व्यवस्था के तहत यात्रियों से न्यूनतम तीन किलोमीटर का किराया लिया जाएगा। वहीं कार पूलिंग के दौरान यदि वाहन में पुरुष यात्री पहले से मौजूद है, तो महिला यात्री को बैठाने से पहले उसकी सहमति लेना जरूरी होगा। महिला यात्री के वाहन में सवार होने पर जहां तक संभव हो, महिला ड्राइवर उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
ड्राइवर की रेटिंग से तय होगा प्रशिक्षण
ऐप पर यात्रा कराने वाले ड्राइवर का विवरण कम से कम सात दिन तक उपलब्ध रखना होगा। ऐप को राज्य परिवहन पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा। हर वाहन और ड्राइवर की रेटिंग यात्रियों के हाथ में होगी। इसी रेटिंग के आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। जिन ड्राइवरों की रेटिंग 5 प्रतिशत से कम होगी, उन्हें हर तिमाही प्रशिक्षण लेना होगा। परिवहन विभाग के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐप आधारित परिवहन सेवाओं को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों की सुरक्षा, जवाबदेही और निगरानी को मजबूत करना है।