Sugar Prices in Chhattisgarh: त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही छत्तीसगढ़ के बाजार में शक्कर और गुड़ की कीमतों में तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। रोजमर्रा की जरूरत में इस्तेमाल होने वाली इन दोनों चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। मौजूदा बाजार में शक्कर करीब 60 से 65 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि गुड़ का भाव 70 रुपए किलो तक बताया जा रहा है। कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब कुछ ही दिनों बाद रक्षाबंधन का त्योहार है। इसके बाद कमरछठ, जन्माष्टमी, पोला, तीजा, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। इन पर्वों के दौरान मिठाइयों और घर में बनने वाले पारंपरिक पकवानों में शक्कर और गुड़ की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में लगातार तेजी का असर आने वाले दिनों में बाजार की मांग पर भी पड़ सकता है।
शक्कर के भाव में लगातार तेजी
छत्तीसगढ़ के बाजार में शक्कर की कीमत कुछ समय पहले तक करीब 45 से 48 रुपए किलो के आसपास थी। इसके बाद भाव बढ़कर 50 से 55 रुपए किलो तक पहुंचा और अब इसमें एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। मौजूदा स्थिति में शक्कर का भाव करीब 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है, जबकि कुछ बाजारों में इसकी कीमत 65 रुपए किलो तक बताई जा रही है। यानी कम समय में शक्कर के दाम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी ने किराना कारोबार से जुड़े व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। कारोबारियों को आशंका है कि यदि कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो त्योहारों के दौरान ग्राहकों की खरीदी प्रभावित हो सकती है।
गुड़ भी हुआ महंगा, 70 रुपए किलो तक पहुंचा भाव
सिर्फ शक्कर ही नहीं, बल्कि गुड़ की कीमत में भी तेजी बनी हुई है। बाजार में गुड़ करीब 70 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। त्योहारों के दौरान गुड़ की मांग भी बढ़ती है। खासकर ग्रामीण और पारंपरिक बाजारों में कई तरह के पकवानों में गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इसकी बढ़ती कीमत का असर भी सीधे उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है। कारोबारियों के मुताबिक शक्कर और गुड़ दोनों के महंगे होने से आने वाले त्योहारों में खरीदारी का पैटर्न बदल सकता है।
खुदरा बाजार में खरीदी करीब 25 फीसदी तक कम
कीमतों में अचानक आई तेजी का असर अब बाजार की बिक्री पर दिखाई देने लगा है। कारोबारियों के अनुसार महंगे दामों के कारण खुदरा खरीदी में करीब 25 फीसदी तक कमी देखी जा रही है। ग्राहक पहले की तुलना में जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में सामान खरीद रहे हैं। वहीं कुछ खरीदार आने वाले दिनों में कीमतों में कमी की उम्मीद में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने से भी बच रहे हैं। त्योहारों से पहले सामान्य तौर पर बाजार में मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार महंगाई के कारण कारोबारी उस तरह की तेजी नहीं देख पा रहे हैं जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
होलसेल कारोबार भी हुआ प्रभावित
कीमतों में तेजी का असर केवल चिल्हर बाजार तक सीमित नहीं है। होलसेल कारोबार में भी सौदों की संख्या घटने की बात सामने आ रही है। कारोबारियों के अनुसार थोक और खुदरा सौदों में करीब 25 फीसदी तक गिरावट बताई जा रही है। बढ़ती कीमतों के बीच व्यापारी भी जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने से बच रहे हैं। इसका एक कारण यह भी है कि यदि महंगे भाव पर माल खरीदकर रखा गया और बाद में बाजार में कीमत नीचे आ गई, तो कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी वजह से बाजार में बड़े सौदों को लेकर सावधानी दिखाई दे रही है।
स्टॉक लिमिट के बावजूद तेजी से कारोबारी हैरान
बाजार में आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4000 क्विंटल की स्टॉक लिमिट का नियम प्रभावी है। इसके बावजूद शक्कर की कीमतों में आई तेजी ने स्टॉकिस्टों को भी चौंका दिया है। स्टॉकिस्टों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाजार में मांग कमजोर होने के बावजूद उन्हें कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर खरीद और भंडारण की रणनीति बनानी पड़ रही है। गुड़ के कारोबार में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। मांग और अग्रिम सौदों को लेकर पूछताछ कम होने के कारण कुछ कारोबारी फिलहाल अपनी भंडारण क्षमता को अस्थायी रूप से कम करने पर विचार कर रहे हैं।
त्योहारों के सीजन में बढ़ सकती है मांग
रक्षाबंधन के बाद लगातार कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। इन त्योहारों में घरों में मिठाइयां और पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिससे शक्कर और गुड़ की खपत बढ़ जाती है। आने वाले प्रमुख त्योहारों में कमरछठ, जन्माष्टमी, पोला, तीजा, गणेश उत्सव, नवरात्रि, विजयादशमी और दीपावली शामिल हैं। ऐसे में कारोबारियों की नजर अब आने वाले दिनों की मांग पर है। अगर त्योहारों के साथ खपत बढ़ती है और आपूर्ति उस अनुपात में नहीं बढ़ी, तो कीमतों पर और दबाव बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि भविष्य के भाव बाजार की वास्तविक आपूर्ति और मांग पर निर्भर करेंगे।
अग्रिम बुकिंग और कारोबार में भी सुस्ती
सामान्य तौर पर कारोबारी आने वाले महीनों की संभावित मांग को देखते हुए पहले से शक्कर और गुड़ का स्टॉक तैयार करना शुरू कर देते हैं। सर्दियों के मौसम और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों से पहले अग्रिम बुकिंग और थोक सौदों में तेजी देखने को मिलती है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंचने के कारण व्यापारी बड़े सौदे करने में सावधानी बरत रहे हैं। बाजार में अग्रिम बुकिंग को लेकर पूछताछ भी पहले की तुलना में कमजोर बताई जा रही है। कारोबारियों का मानना है कि जब तक बाजार में कीमतों की दिशा स्पष्ट नहीं होती, तब तक बड़े स्तर पर स्टॉक करना जोखिम भरा हो सकता है।
महंगाई का असर आम लोगों की त्योहारों की तैयारी पर
शक्कर और गुड़ ऐसी वस्तुएं हैं जिनकी खपत केवल बाजार में मिठाई खरीदने तक सीमित नहीं रहती। त्योहारों के दौरान घरों में बनने वाले पकवानों और मिठाइयों में भी इनका इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों के लिए जिन्हें त्योहारों के दौरान बड़ी मात्रा में शक्कर या गुड़ की जरूरत होती है। यदि कीमतों में आगे भी तेजी बनी रहती है तो उपभोक्ता कम मात्रा में खरीदारी करने या वैकल्पिक विकल्प तलाशने की कोशिश कर सकते हैं।
कारोबारियों की नजर अब आने वाले दिनों के बाजार पर
फिलहाल शक्कर और गुड़ के कारोबार से जुड़े लोगों की नजर बाजार की अगली चाल पर है। एक तरफ त्योहारों के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि आने वाले दिनों में थोक बाजार में कीमतों का रुख कैसा रहता है। मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनने पर बाजार में स्थिरता आ सकती है, जबकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कमजोर रही तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।