कोलकाता: दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ बंगाल के मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। कोलकाता के खुदरा बाजार में पिछले दो सप्ताह के दौरान चीनी की कीमत करीब ₹48 प्रति किलो से बढ़कर ₹68-70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। चीनी के साथ गुड़ की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। ऐसे में त्योहारों के दौरान मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच कारोबारियों पर लागत का दबाव और बढ़ने की आशंका है।
थोक बाजार में भी कीमतों का दबाव
जानबाजार समेत कोलकाता की प्रमुख थोक मंडियों में 50 किलो चीनी की बोरी करीब ₹3,250 में बिक रही है। यानी थोक स्तर पर ही कीमत लगभग ₹65 प्रति किलो बैठ रही है। इसके बाद परिवहन और अन्य खर्च जुड़ने से खुदरा कीमत ₹68 से ₹70 प्रति किलो तक पहुंच रही है। व्यापारियों का कहना है कि इतनी ऊंची खरीद कीमत के कारण खुदरा बिक्री में उनका मुनाफा काफी कम हो गया है।
मिठाइयों के दाम बढ़ने का खतरा
चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर बंगाल के प्रसिद्ध मिठाई उद्योग पर पड़ सकता है। मिठाई कारोबारियों का कहना है कि अगर चीनी के दाम लंबे समय तक इसी स्तर पर बने रहे, तो त्योहारों के दौरान मिठाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी करना पड़ सकता है। दुर्गा पूजा और उसके बाद आने वाले त्योहारों में मिठाइयों की मांग आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ने से दुकानदारों के सामने कीमतों को नियंत्रित रखने की चुनौती होगी।
उत्पादन और स्टॉक में कमी बनी वजह
बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक के बीच बढ़ता अंतर प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। अनुमान के मुताबिक मौजूदा सीजन में देश में चीनी का उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है, जबकि खपत लगभग 2.85 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसके अलावा नए सीजन की शुरुआत में ओपनिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन तक रहने की आशंका है। इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर भी उद्योग में बहस है। हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के लिए इथेनॉल डायवर्जन को प्रमुख वजह मानने से इनकार किया है।
बंगाल दूसरे राज्यों की सप्लाई पर निर्भर
पश्चिम बंगाल में रिफाइंड चीनी का स्थानीय उत्पादन बेहद सीमित है। इसलिए राज्य की मांग काफी हद तक महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से आने वाली आपूर्ति पर निर्भर रहती है। आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी या कीमतों में राष्ट्रीय स्तर पर तेजी का असर बंगाल के बाजार पर भी तेजी से दिखाई देता है।
केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को दी मंजूरी
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह कदम घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, व्यापारिक संगठनों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और देश की कुल खपत को देखते हुए आयात की यह मात्रा कीमतों को तुरंत नीचे लाने के लिए पर्याप्त साबित होगी या नहीं, यह देखना होगा। फिलहाल त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में आई तेजी ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ बंगाल के मिठाई कारोबार के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।