भोपाल: मध्य प्रदेश में PM Kisan Samman Nidhi की किस्त का इंतजार कर रहे किसानों से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कई किसानों के खातों में किस्त नहीं पहुंची तो इसकी जांच शुरू की गई। जांच में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर ऐसा खुलासा हुआ, जिसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
किस्त रुकी तो जमीन के रिकॉर्ड की हुई जांच
मामले में जब किसानों की जानकारी और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, तो सामने आया कि दर्जनों किसानों की करीब 50 एकड़ जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज है। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड की जांच और मामले की पड़ताल तेज कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि जमीन के रिकॉर्ड में नाम बदलने के कारण किसानों की पात्रता और PM Kisan से जुड़ी जानकारी प्रभावित हुई। इसके चलते कई किसानों को योजना की राशि मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसानों को कैसे पता चला?
किसानों को जब PM Kisan की किस्त खाते में नहीं मिली तो उन्होंने संबंधित विभाग और अधिकारियों से जानकारी ली। जांच के दौरान जमीन के दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया गया। इसी प्रक्रिया में जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
50 एकड़ जमीन का मामला, जांच शुरू
मामला सामने आने के बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जमीन के रिकॉर्ड में नाम किस तरह बदले गए और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है। यदि जांच में रिकॉर्ड में गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों के लिए जरूरी है ये काम
अगर किसी किसान को PM Kisan की किस्त नहीं मिली है, तो उसे सबसे पहले PM Kisan पोर्टल पर अपनी स्थिति और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी जांचनी चाहिए। साथ ही स्थानीय पटवारी या राजस्व विभाग से जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जा सकता है। किसानों को यह भी देखना चाहिए कि उनके नाम पर दर्ज जमीन का खसरा, खतौनी और अन्य राजस्व रिकॉर्ड सही हैं या नहीं।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल करीब 50 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में नाम किस प्रक्रिया के तहत बदले गए और कितने किसानों की जमीन वास्तव में प्रभावित हुई है। किसानों को सलाह है कि वे अपने जमीन संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित राजस्व अधिकारी को शिकायत दें।