Sugar Price Hike: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई शहरों में चीनी का खुदरा भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने चीनी के आयात और घरेलू स्टॉक में कमी को लेकर सरकार से सवाल पूछे हैं। खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए कहा कि एक तरफ सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है, वहीं दूसरी ओर घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए विदेश से चीनी मंगाने की स्थिति क्यों बनी, इसका जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के सामने तीन सवाल रखते हुए चीनी की कीमतों, स्टॉक और एथेनॉल नीति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं केंद्र सरकार ने चीनी की महंगाई के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है।
तीन महीने में 19 रुपये तक महंगी हुई चीनी
चीनी की कीमतों में पिछले कुछ महीनों के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कई शहरों में इसका खुदरा भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बताया गया है कि करीब तीन महीने में चीनी के दाम लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इस दौरान प्रति किलो कीमत में करीब 19 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों के मौसम में चीनी की खपत बढ़ने के कारण कीमतों में यह उछाल सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है। रक्षाबंधन सहित आने वाले त्योहारों में मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ने की संभावना रहती है।
खड़गे ने सरकार से पूछे तीन सवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी के स्टॉक और आयात को लेकर केंद्र सरकार से तीन सवाल किए हैं। उनका सवाल है कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया। दूसरा सवाल 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को लेकर है। खड़गे ने पूछा कि जब भारत चीनी उत्पादन के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है तो विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। तीसरा सवाल उन्होंने एथेनॉल नीति को लेकर उठाया। उनका तर्क है कि एक तरफ घरेलू चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता है और दूसरी तरफ गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए चीनी उत्पादन की क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि जब देश आत्मनिर्भर बनने की बात कर रहा है तो चीनी के मामले में आयात की जरूरत क्यों पड़ी।
सरकार ने एथेनॉल को कीमत बढ़ने की वजह मानने से किया इनकार
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने एथेनॉल उत्पादन को इसका मुख्य कारण मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई दूसरे कारण भी हैं। इनमें घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग में वृद्धि, मौसम के कारण गन्ने की फसल को हुआ नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई से जुड़ा दबाव शामिल है। सरकार के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, जो बढ़कर लगभग 56 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं एक्स-मिल कीमत में भी कुछ ही दिनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। खाद्य सचिव ने मिलों द्वारा अचानक कीमतें बढ़ाने को अनुचित बताया है।
एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल होने का सरकार का दावा
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम हुई है। खाद्य सचिव के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई। मौजूदा सीजन में एथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 28 लाख टन चीनी डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई है। सरकार का तर्क है कि देश में बनने वाले एथेनॉल का बड़ा हिस्सा अब चीनी के बजाय मक्का जैसे अनाज से तैयार हो रहा है। ऐसे में चीनी की मौजूदा महंगाई को केवल एथेनॉल नीति से जोड़ना सही नहीं होगा।
चीनी के साथ गुड़ और दूसरे खाद्य पदार्थ भी महंगे
महंगाई का असर सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों में गुड़ की कीमत में करीब 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है। इसी अवधि में चावल करीब 16 प्रतिशत और मक्के का आटा लगभग 11 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में एक साथ बढ़ोतरी होने से त्योहारों के दौरान घरेलू खर्च बढ़ने की आशंका है। खासकर मिठाई और पारंपरिक पकवानों में चीनी तथा गुड़ की खपत अधिक होने के कारण इनकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
चीनी का शुरुआती स्टॉक भी घटा
चीनी की मौजूदा कीमतों को लेकर एक बड़ी वजह मिलों के पास उपलब्ध शुरुआती स्टॉक में कमी को भी बताया जा रहा है। पिछले सीजन में नई पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का स्टॉक था। इस बार यह घटकर लगभग 32 लाख टन रह गया है। यानी नया पेराई सीजन शुरू होने से पहले मिलों के पास उपलब्ध बफर स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम है। इससे बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
उत्पादन अनुमान भी घटा
देश में चीनी उत्पादन को लेकर शुरुआती अनुमान में भी कमी आई है। वर्ष 2025-26 में पहले करीब 343 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर करीब 306 लाख टन किए जाने की जानकारी सामने आई। गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ अधिक बारिश से नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। फसल प्रभावित होने का असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ा। उत्पादन घटने और शुरुआती स्टॉक कम रहने के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की स्थिति बनी।
सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात की अनुमति दी
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इस कच्ची चीनी को घरेलू चीनी मिलों में रिफाइन करने के बाद बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है।
करीब 10 साल बाद आयात की जरूरत
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है और ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक एवं निर्यातक देश बताया जाता है। भारत ने वर्ष 2021-22 में करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का रिकॉर्ड निर्यात किया था। इसके बाद निर्यात में कमी आई। घरेलू बाजार में आपूर्ति कम पड़ने की स्थिति में भारत पहले भी विदेशों से कच्ची चीनी आयात करता रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। इसके बाद अब एक बार फिर आयात की जरूरत सामने आई है।
सरकार को सितंबर तक पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद
हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर 2026 के अंत तक करीब 33 से 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच सकता है। सरकार का मानना है कि यह घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त रहेगा। यानी सरकार एक तरफ सीमित अवधि के लिए आयात के जरिए बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नए पेराई सीजन का इंतजार भी किया जा रहा है।
अक्टूबर में नई पेराई शुरू होने की उम्मीद
सरकार के अनुसार इस साल चीनी मिलों में नए पेराई सीजन की शुरुआत करीब 15 अक्टूबर के आसपास हो सकती है। नए सीजन की शुरुआत के साथ अक्टूबर में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। यदि पेराई सीजन समय पर शुरू होता है और उत्पादन उम्मीद के मुताबिक रहता है तो बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट लागू
सरकार ने कीमतों को नियंत्रित रखने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए चीनी के स्टॉक पर भी सीमा तय की है। डीलर्स के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट निर्धारित की गई है। वहीं 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदारों को 15 दिन की खपत से अधिक चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने और जमाखोरी के जरिए कीमत बढ़ाने की संभावनाओं को रोकना है।
अब कीमतों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर फिलहाल सरकार और विपक्ष के तर्क अलग-अलग हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसे सरकार की नीतियों और घरेलू स्टॉक की स्थिति से जोड़ते हुए सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं और एथेनॉल नीति को इसका जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अब आने वाले महीनों में चीनी मिलों का उत्पादन, नए पेराई सीजन की शुरुआत और बाजार में सप्लाई की स्थिति यह तय करेगी कि कीमतों में राहत कब तक मिलती है।