कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा अध्याय लिखा गया जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा। कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार रहे सुवेंदु अधिकारी ने अब उनके राजनीतिक वजूद को उन्हीं के गढ़ 'भवानीपुर' में चुनौती देकर परास्त कर दिया है। 2011 में वामपंथ के खिलाफ जिस 'परिवर्तन' की नींव सुवेंदु ने नंदीग्राम में रखी थी, 2026 में उसी 'परिवर्तन के परिवर्तन' के नायक भी वही बनकर उभरे हैं।
भवानीपुर में 'सर्जिकल स्ट्राइक'
भवानीपुर से चुनाव लड़ना सुवेंदु का अपना फैसला था। सूत्रों के अनुसार, जब अमित शाह ने उनसे भवानीपुर के लिए उम्मीदवार का नाम पूछा, तो सुवेंदु ने खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी ली और वादा किया कि वे ममता बनर्जी को उनके घर में हराकर दिखाएंगे। पीएम मोदी और शाह की अनुमति के बाद पिछले डेढ़ महीने में जो हुआ, वह किसी रोमांचक फिल्म की पटकथा से कम नहीं था। सुवेंदु ने न केवल चुनाव जीता, बल्कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद पर उनके नैतिक अधिकार को भी चुनौती दे दी।
अपमान से सम्मान तक का सफर
सुवेंदु और ममता के बीच दरार उसी दिन आ गई थी जब तृणमूल में अभिषेक बनर्जी का उदय हुआ। सुवेंदु ने महसूस किया कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने जान जोखिम में डालकर लालगढ़ और जंगलमहल में संगठन बनाया, वहां अब परिवारवाद हावी है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी उन्हें आगाह किया था कि टीएमसी में उनका कोई भविष्य नहीं है। अंततः 2020 में पार्टी छोड़ने के बाद, सुवेंदु ने भाजपा को बंगाल में लड़ना सिखाया।
25 वैशाख को शपथ ग्रहण!
स्वपन दासगुप्ता जैसे दिग्गज नेताओं ने भी स्वीकार किया है कि भाजपा की इस महाविजय के पीछे सुवेंदु अधिकारी का अथक परिश्रम है। 2021 में ममता नंदीग्राम जाकर हारी थीं, और 2026 में सुवेंदु अधिकारी ने उनके घर में घुसकर उन्हें मात दी। अब बंगाल में 'दीदी-राज' के अंत के साथ ही सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की तैयारी है। माना जा रहा है कि 25 वैशाख (बंगाली कैलेंडर के अनुसार) को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा।