कोलकाता: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि 9 मई को नई सरकार बनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं फोन कर पूरे राज्य में उनकी जयंती को भव्य और सम्मानजनक तरीके से मनाने का निर्देश दिया था। इसी के तहत राज्य सरकार ने सरकारी अवकाश घोषित किया है, 10 हजार कार्यक्रम आयोजित करने और 125 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने का फैसला लिया है।
जीराट में बनेगा विश्वस्तरीय संग्रहालय
मुख्यमंत्री ने बताया कि हुगली के जीराट स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पैतृक भूमि राज्य सरकार पहले ही खरीद चुकी है। यहां विश्वस्तरीय संग्रहालय और भव्य स्मारक का निर्माण किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से परिचित हो सकें।
पश्चिम बंगाल के गठन में भूमिका का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली हिंदुओं के लिए पश्चिम बंगाल राज्य के गठन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने दावा किया कि 20 जून 1947 को उनके नेतृत्व में तत्कालीन विधानसभा में 58-21 मतों से पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस, 34 वर्षों के वाम शासन और उसके बाद 15 वर्षों तक तृणमूल सरकार ने इस ऐतिहासिक तथ्य को पाठ्यपुस्तकों से दूर रखा।
'पश्चिम बंगाल दिवस' को लेकर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विभिन्न राजभवनों में 20 जून को 'पश्चिम बंगाल दिवस' के रूप में मनाया जा रहा था, तब तत्कालीन राज्य सरकार ने 1 बैशाख को पश्चिम बंगाल दिवस के रूप में लागू किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इतिहास की इस कथित विकृति को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।
अनुच्छेद 370 हटाने पर मोदी और शाह का जताया आभार
मुख्यमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रसिद्ध नारे "एक देश में दो प्रधान, दो निशान, दो विधान नहीं चलेंगे" का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाना उनके विचारों का सम्मान है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति बंगालवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।
रवींद्रनाथ टैगोर की कविता के साथ किया संबोधन समाप्त
अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने रवींद्रनाथ टैगोर की कविता की पंक्तियां उद्धृत करते हुए देश और समाज के प्रति समर्पण का संदेश दिया तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।