कोलकाता: बांग्लादेश से निर्वासित विश्वप्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बुधवार को कोलकाता से रवाना होने से पहले हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपनी वतन वापसी और कोलकाता प्रवास पर विचार साझा किए। पिछले 32 वर्षों से स्वदेश से निर्वासित लेखिका ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश सरकार द्वारा उनका बांग्लादेशी पासपोर्ट रिन्यू न करने और उनके स्वीडिश पासपोर्ट पर भी वीज़ा न देने के कारण वैध दस्तावेजों के अभाव में वे अपने देश नहीं लौट पा रही हैं। ऐसे में वे फिलहाल भारत में ही रहेंगी।
कोलकाता दौरे से जुड़ी मधुर यादें और जनता का प्यार
वर्ष 2007 में पुस्तक विवाद के कारण कोलकाता छोड़ने के बाद 19 साल बाद इस सांस्कृतिक शहर में लौटीं तस्लीमा नसरीन ने कहा कि वे कोलकाता से बेहद मधुर स्मृतियां लेकर लौट रही हैं। लोगों से मिले अपार प्रेम का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विदाई के क्षण में उनकी आंखों में आंसू आ गए। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक 'कॉफी हाउस' में समय बिताया और पानीहाटी हाई स्कूल में बेगम रोकिया की समाधि व मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आगामी योजनाएं और पुस्तक मेले में आने का ऐलान
तस्लीमा नसरीन ने जानकारी दी कि वे आगामी अक्टूबर या जनवरी में पुनः कोलकाता आ सकती हैं और कोलकाता पुस्तक मेले में अवश्य शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि जिस शहर को उन्हें विवादों के कारण छोड़ना पड़ा था, वहीं उनकी आत्मकथा के अगले हिस्से और नई पुस्तकें प्रकाशित होंगी। हालांकि, दुर्गा पूजा के समय वे किसी अन्य देश में होने के कारण कोलकाता नहीं आ सकेंगी।
2007 का कोलकाता विवाद और 19 साल बाद वापसी
साल 2007 में अपनी पुस्तक 'द्विधा' और आत्मकथा के अंशों को लेकर हुए भारी विरोध और हिंसक प्रदर्शनों के बाद तस्लीमा नसरीन को पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा था। लगभग 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोलकाता लौटने पर उन्होंने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस शहर से उन्हें जाना पड़ा था, उसी शहर की जनता का प्यार पाकर वे बहुत भावुक हैं और आगामी पुस्तक मेले में उनकी आत्मकथा के आगे के खंड प्रकाशित होंगे।
स्वीडिश नागरिकता और वैध दस्तावेजों की मजबूरी
तस्लीमा नसरीन ने अपनी कानूनी और प्रशासनिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि बांग्लादेशी अधिकारियों ने न केवल उनका मूल पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार कर दिया है, बल्कि उनके पास मौजूद स्वीडिश (Swedish) पासपोर्ट पर भी बांग्लादेश का वीज़ा जारी नहीं किया जाता। बिना किसी वैध यात्रा दस्तावेज के बांग्लादेश प्रवेश संभव न होने के कारण, भारत ही उनके लिए एकमात्र सुरक्षित और स्थायी ठिकाना बना हुआ है।