मुंबई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को E20 (एथेनॉल ब्लेंडिंग) नीति से जुड़े कथित फर्जी और मानहानिकारक पोस्ट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मेटा (Facebook), X (पूर्व में ट्विटर) और गूगल को ऐसे सभी आपत्तिजनक पोस्ट तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की सामग्री घिनौनी, अपमानजनक, अश्लील और मानहानिकारक है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों से पूछा बड़ा सवाल
जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया कंपनियों से पूछा कि जब उनके पास अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है तो ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान कर उसे स्वतः हटाने की व्यवस्था क्यों नहीं है। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर किसी के खिलाफ "जहर" नहीं उगल सकता।
भविष्य में भी हटाने होंगे ऐसे पोस्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भविष्य में भी इस तरह की पोस्ट सामने आती हैं तो नितिन गडकरी सीधे संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संपर्क कर सकते हैं और कंपनियों को उन्हें हटाना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसा सिस्टम विकसित करना चाहिए जिससे कोर्ट जाने की नौबत ही न आए और आपत्तिजनक सामग्री स्वतः हटाई जा सके।
4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। तब तक अदालत के निर्देशों के पालन की स्थिति पर भी विचार किया जाएगा।
11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
नितिन गडकरी ने मेटा, गूगल और एक्स के खिलाफ दायर याचिका में आरोप लगाया है कि E20 और एथेनॉल नीति को लेकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए झूठे और मानहानिकारक पोस्ट किए गए। याचिका में 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की गई है।याचिका के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम और E20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, जबकि सोशल मीडिया पोस्ट में गडकरी और उनके परिवार पर इससे निजी आर्थिक लाभ लेने के बेबुनियाद आरोप लगाए गए।