पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले निष्पक्षता को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। खंडघोष ब्लॉक की जॉइंट बीडीओ ज्योत्सना खातून को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में प्रचार करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
सरकारी अधिकारी पर गंभीर आरोप
निर्वाचन आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने अपने पद की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। यह आचरण चुनावी आचार संहिता के खिलाफ माना गया है। मामले में प्राथमिक जांच के बाद कार्रवाई की गई है।
मुख्य सचिव को सख्त निर्देश
आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि निलंबन के साथ-साथ अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाए। साथ ही, जल्द से जल्द उनकी जगह नए अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा गया है।
विपक्ष की शिकायत के बाद कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों की शिकायत के बाद यह मामला आयोग के संज्ञान में आया। आरोप था कि सरकारी पद पर रहते हुए खुलकर एक राजनीतिक दल के समर्थन में प्रचार किया जा रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस कार्रवाई के बीच आयोग ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कथित रूप से सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों की सुरक्षा में लगाया गया था, जिस पर अब समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
EC का साफ संदेश
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी सरकारी अधिकारी की राजनीतिक संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।