पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। देश के संविधान को अपनी कला से सजाने वाले महान कलाकार नंदलाल बोस के परिवार को ही इस बार सिस्टम की खामी का सामना करना पड़ा है। उनके पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी दीपा सेन का नाम वोटर लिस्ट से गायब पाया गया है।
दस्तावेज जमा, घर पर जांच—फिर भी नहीं मिला अधिकार
शांतिनिकेतन में रहने वाले बुजुर्ग दंपत्ति का कहना है कि उन्होंने पासपोर्ट, पेंशन रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे थे। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने उनके घर पहुंचकर वेरिफिकेशन भी किया था। इसके बावजूद अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
52 साल से साथ रहने वाले व्यक्ति का भी नाम कटा
हैरानी की बात यह है कि उनके साथ पिछले कई दशकों से रह रहे चक्रधर नायक का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इससे पूरे मामले पर और सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
कौन हैं सुप्रबुद्ध सेन?
सुप्रबुद्ध सेन, नंदलाल बोस की बेटी जमुना सेन के पुत्र हैं। उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और दामोदर वैली कॉरपोरेशन में लंबे समय तक सेवा देने के बाद शांतिनिकेतन में बस गए।
संविधान से जुड़ी विरासत
नंदलाल बोस भारतीय कला जगत के बड़े नाम रहे हैं। उन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संविधान की मूल प्रति को चित्रों से सजाने की जिम्मेदारी दी थी। उनकी बनाई कलाकृतियां आज भी भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि नाम कटने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को ट्रिब्यूनल में अपील करने की सलाह दी है।
बढ़ता विवाद, उठ रहे सवाल
इस घटना ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इतने प्रतिष्ठित परिवार का नाम ही सूची से गायब हो सकता है, तो आम मतदाताओं की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।