कोलकाता: पश्चिम बंगाल में लंबे समय के अंधकार को पीछे छोड़कर आखिरकार बदलाव की बयार बहने लगी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब नए उद्योगों और रोजगार के सपनों को पंख मिलने लगे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में जहां बंगाल ने उद्योगों का सूखा देखा, वहीं अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार के आते ही निवेशकों का भरोसा वापस लौट रहा है। उद्योग जगत का अब एक ही नारा है— ‘भय आउट, भरोसा इन’।
दक्षिण कोलकाता के रेस्तरां में 'पॉवर लंच' और नया रोडमैप
रविवार को दक्षिण कोलकाता के एक रेस्तरां में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने राज्य के औद्योगिक भविष्य की नई इबारत लिख दी है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और जाने-माने अर्थशास्त्री संजीव सन्याल, राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता और उद्योग मंत्री तापस राय के बीच एक 'पॉवर लंच' हुआ। इस मुलाकात के बाद यह साफ हो गया है कि बंगाल को आर्थिक रूप से 'पॉवरफुल' बनाने का मुकम्मल रोडमैप तैयार कर लिया गया है।
₹3,250 करोड़ से अधिक के निवेश का बंपर ऐलान
अमूल और रश्मि ग्रुप के बाद अब देश की दिग्गज कंपनियों ने बंगाल में निवेश की झड़ी लगा दी है:
पीयरलेस समूह (Peerless Group): ₹1,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव।
अमूल (Amul): दुनिया की सबसे बड़ी दूध सहकारी संस्था अमूल बंगाल में ₹650 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट लगाने जा रही है।
बर्जर पेंट्स (Berger Paints): कंपनी ने राज्य में ₹600 करोड़ के नए निवेश की घोषणा की है।
उद्योग मंत्री तापस राय ने कहा: "अमूल ₹650 करोड़ का निवेश कर रहा है और आने वाले दिनों में ऐसे सैकड़ों करोड़ के निवेश होंगे। पिछले 15 सालों में बंगाल में कोई बड़ा उद्योग नहीं आया, जिससे युवाओं को राज्य छोड़ना पड़ा। सरकारी नौकरियों के अलावा जब तक उद्योगों में रोजगार नहीं बढ़ेगा, राज्य खड़ा नहीं हो सकता। हमारी सरकार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार यहीं काम देगी।"
सिंडिकेट राज और जबरन वसूली पर लगेगा कानूनी ताला
बीजेपी सरकार का मानना है कि टीएमसी के जमाने में बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट (BGBS) के नाम पर सिर्फ खोखले वादे हुए, लेकिन जमीन पर कोई भारी उद्योग नहीं आया। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य सरकार की दोषपूर्ण भूमि नीति, जबरन वसूली (तोलाबाजी) और सिंडिकेट राज था।
इस पर कड़ा प्रहार करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा: "जबरन वसूली और सिंडिकेट के दखल ने बंगाल के व्यापार को बर्बाद कर दिया। हमारी सरकार जल्द ही एक सख्त कानून लाने जा रही है, जो इस सिंडिकेट चार्ज और अवैध वसूली को पूरी तरह खत्म कर देगा। कानून के मुताबिक ही व्यापार चलेगा।"
खोया हुआ गौरव वापस पाने की कोशिश
कभी देश की जीडीपी (GDP) में अग्रणी रहने वाला पश्चिम बंगाल पिछले कुछ दशकों में काफी पिछड़ गया था। 'घर में काम नहीं, पेट में भात नहीं' की स्थिति से जूझ रहे बंगाल के लोगों को अब इस सत्ता परिवर्तन से बड़ी उम्मीदें हैं। बीजेपी सरकार भी जनता की इन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी ताकत से जुट गई है ताकि बंगाल से युवाओं का पलायन रोका जा सके।