कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन का दावा किया है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि भारी मतदान का सीधा फायदा तृणमूल को मिला है और भाजपा इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि जिन 152 सीटों पर वोटिंग हुई, वहां के रुझानों से पार्टी के पक्ष में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
BJP पर “पैनिक रिएक्शन” का आरोप
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र के शीर्ष नेताओं ने बंगाल और यहां के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए। पार्टी के अनुसार, पहले चरण के बाद भाजपा संभावित हार को भांपकर “घबराहट में प्रतिक्रिया” दे रही है। कुणाल घोष ने कहा कि इस बार चुनाव में उनकी जीत की नींव पड़ चुकी है और अगले चरणों में यह बढ़त और मजबूत होगी।
“रिकॉर्ड जीत” और चौथी बार ममता सरकार का दावा
तृणमूल नेताओं का कहना है कि इस बार पार्टी इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज कर सकती है। उनका दावा है कि ममता बनर्जी एक बार फिर चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। पार्टी ने लोगों से अपील की है कि वे अगले चरणों में भी बड़ी संख्या में मतदान करें।
ललितेश त्रिपाठी ने भी साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद ललितेश त्रिपाठी ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल और बंगालियों के खिलाफ दिए गए बयानों का असर चुनावी नतीजों में दिखाई देगा। उनके मुताबिक, पहले चरण में भारी मतदान इसी नाराजगी का संकेत है।
अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया
अमित शाह के कोलकाता से जुड़े बयान की आलोचना करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि आने वाले चरणों में शहर के मतदाता इसका जवाब देंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा इस चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार नहीं दिखी, जिसका असर कई बूथों पर कम सक्रियता के रूप में नजर आया।
भीड़ और लोकप्रियता को लेकर तुलना
तृणमूल नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता अब भी मजबूत है, जबकि अभिषेक बनर्जी की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ भाजपा के कार्यक्रमों से कहीं ज्यादा है। सुवेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं।
देश की राजनीति पर भी नजर
ललितेश त्रिपाठी ने कहा कि बंगाल में भाजपा को मिली चुनौती का असर राष्ट्रीय राजनीति में भी दिखेगा। उनका मानना है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा और देश में बदलाव की शुरुआत बंगाल से हो सकती है।