कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अमान्य मदरसों की पहचान के लिए गठित विशेष सर्वे टीमों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य के अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में इन संस्थानों की गतिविधियों के साथ-साथ उनके वित्तीय स्रोतों की गहराई से जांच कराने की आवश्यकता जताई गई है। अब सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
आर्थिक स्रोतों की विस्तृत जांच की मांग
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कई अमान्य मदरसों को स्थानीय स्तर के अलावा अन्य संगठनों से भी आर्थिक सहायता मिलने के संकेत मिले हैं। ऐसे में रिपोर्ट में धन कहां से आ रहा है, उसका उपयोग कैसे हो रहा है और उसकी वैधता की पुष्टि के लिए विशेष जांच एजेंसियों की मदद लेने की सिफारिश की गई है।
सीमावर्ती इलाकों में मिले अधिकतर मदरसे
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में अमान्य या खारिजी मदरसे भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। इस तथ्य को रिपोर्ट में महत्वपूर्ण माना गया है और इसे ध्यान में रखते हुए आगे की जांच का सुझाव दिया गया है।
सरकार बदलने के बाद कराया गया था सर्वेक्षण
राज्य में नई भाजपा सरकार के गठन के बाद 12 जिलों में अमान्य मदरसों की स्थिति का आकलन करने के लिए यह विशेष सर्वेक्षण शुरू किया गया था। सर्वे टीमों ने विभिन्न जिलों का दौरा कर संस्थानों की स्थिति, संचालन और अन्य पहलुओं का अध्ययन किया।
रिपोर्ट के आधार पर आगे होगा फैसला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, संबंधित विभाग अब रिपोर्ट के सभी बिंदुओं की समीक्षा करेगा। इसके बाद आवश्यक होने पर विस्तृत जांच, सत्यापन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि सभी कदम कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत उठाए जाएंगे।