कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 21 जुलाई का दिन हमेशा से बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक रहा है। साल 1993 में पुलिस की गोलीबारी में मारे गए 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की याद में होने वाला यह आयोजन इस बार पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। तृणमूल कांग्रेस में आए भूचाल और विभाजन के बाद, अब 'असली तृणमूल' का दावा करने वाला बागी ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) का खेमा इस साल इतिहास को दोहराने के साथ-साथ पुरानी परंपराओं को बदलने जा रहा है।
ममता बनर्जी को राजनीतिक रूप से 'निःसंदेह और अलग-थलग' करने के बाद, ऋतब्रत गुट इस बार मध्य कोलकाता में गांधी मूर्ति के पाददेश (मेयो रोड) पर भव्य शहीद दिवस रैली की तैयारियों में जुट गया है। इस सिलसिले में आयोजित एक अहम रणनीतिक बैठक में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान होने वाले आयोजनों पर तीखा तंज कसा और स्पष्ट किया कि इस बार का मंच किसी ग्लैमर या मनोरंजन का जरिया नहीं बनेगा।
'मंच नाच-गाने का नहीं, सेलिब्रिटीज की नो-एंट्री'
पिछले 15 वर्षों के तृणमूल शासन में 21 जुलाई की रैली एक मेगा पॉलिटिकल-इंटरटेनमेंट इवेंट में तब्दील हो चुकी थी। सुबह से ही मंच पर टॉलीवुड (बंगाल फिल्म इंडस्ट्री) के सितारों का मेला लग जाता था, गाना-बजाना होता था और फिर अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की एंट्री के साथ रेड रोड पर 'रैंप वॉक' जैसा नजारा दिखता था। आलोचक हमेशा आरोप लगाते थे कि इस तमाशे में असली शहीद परिवार पीछे छूट जाते हैं।
इसी ढर्रे पर कड़ा प्रहार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने तैयारी बैठक में साफ शब्दों में कहा:"21 जुलाई का मंच नाचना-गाना करने के लिए नहीं है। इस बार हमारे मंच पर फिल्मी सेलिब्रिटीज के लिए कोई जगह नहीं होगी। मंच सिर्फ और सिर्फ शहीद परिवारों का होगा और उन्हें ही सबसे ज्यादा सम्मान और महत्व दिया जाएगा। हम प्रशासन से बातचीत कर, सभी नियमों का पालन करते हुए गरिमापूर्ण तरीके से यह कार्यक्रम करेंगे।"
मंच से मांगा जाएगा पार्टी फंड का हिसाब
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भी उछाला। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई के इसी ऐतिहासिक मंच से वे जनता और कार्यकर्ताओं को बताएंगे कि पहाड़ (दार्जिलिंग) से लेकर सागर (सुंदरबन) तक के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के पसीने से बने 'पार्टी फंड' का करोड़ों रुपया कहां और किसके लिए खर्च किया गया। इसका पूरा हिसाब इस बार सार्वजनिक किया जाएगा।
6 जिलों को सौंपी गई जिम्मेदारी, भारी जनसैलाब का दावा
दक्षिण कोलकाता के एक होटल में आयोजित इस उच्च स्तरीय तैयारी बैठक में आगामी रैली को सफल बनाने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। ऋतब्रत गुट ने मुख्य रूप से दक्षिण बंगाल के छह रणनीतिक जिलों—कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, नदिया, हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24 परगना के शीर्ष नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि इसे महज एक राजनीतिक रैली न मानकर पार्टी के इतिहास, कार्यकर्ताओं के खून-पसीने के संघर्ष और भावनाओं से जुड़ा दिन मानकर प्रचार किया जाए। बूथ, ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को कोलकाता लाने के लिए सक्रिय कर दिया गया है।
अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के खेमे को चुनौती देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने आत्मविश्वास से कहा, "मुझे तृणमूल के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है। कौन हमारे साथ खड़ा है और किसकी ताकत कितनी है, यह देखने के लिए विरोधियों को बस 21 जुलाई तक का इंतजार करना चाहिए।"