कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव से पहले हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। एक ओर अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी ने नवान्न पहुंचकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक चर्चाओं ने नया मोड़ ले लिया है। इन दोनों घटनाक्रमों को आगामी राज्यसभा उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
नवान्न पहुंचे प्रसेनजीत, मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात
अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी शुक्रवार को नवान्न पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। बताया गया कि मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले ही प्रसेनजीत सचिवालय पहुंच गए थे। हालांकि इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ीं अटकलें
कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर प्रसेनजीत चटर्जी के आवास पहुंचे थे और उनसे मुलाकात की थी। अब अमित शाह से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से उनकी भेंट को राज्यसभा उपचुनाव से पहले के राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा में शामिल हुए TMC के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद
इसी बीच साल्टलेक स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद—सुखेंदुशेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक—औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
राज्यसभा उपचुनाव से पहले उम्मीदवारों को लेकर चर्चा
24 जुलाई को पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। माना जा रहा है कि भाजपा इन सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश करने की तैयारी में है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सुखेंदुशेखर राय और प्रकाश चिक बराइक के नाम भाजपा उम्मीदवारों की संभावित सूची में चर्चा का विषय बने हुए हैं, हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
तीनों सीटों पर क्यों हो रहा है उपचुनाव?
दरअसल, सुखेंदुशेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद ये तीनों सीटें रिक्त हुई थीं। इसी वजह से निर्वाचन आयोग ने 24 जुलाई को इन सीटों पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। ऐसे में लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों ने बंगाल की सियासत को और भी दिलचस्प बना दिया है।