कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई ट्रांसफर नीति में पहली बार उम्र को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शिक्षकों का बेहतर उपयोग होगा और जिन स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
PTR के आधार पर होगा अतिरिक्त शिक्षकों का तबादला
नई नीति के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को सबसे अहम आधार बनाया जाएगा। जिन शहरी स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां से अतिरिक्त शिक्षकों की पहचान कर उन्हें उन ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां शिक्षकों की कमी है। सरकार का लक्ष्य पूरे राज्य में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक नियुक्ति का ट्रांसफर पर नहीं पड़ेगा असर
शिक्षा मंत्री ने साफ कहा कि किसी शिक्षक की नियुक्ति सीपीआई(एम), तृणमूल कांग्रेस या भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई है या नहीं, इसका तबादले की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होगा। सभी निर्णय केवल विभागीय आवश्यकता, PTR और तय मानकों के आधार पर लिए जाएंगे।
वरिष्ठ शिक्षकों को मिलेगी राहत
सरकार का मानना है कि 50 से 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र के शिक्षकों के लिए रोजाना 40 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय कर दूरस्थ स्कूलों में पढ़ाना आसान नहीं होता। लंबी यात्रा का असर उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षण कार्य पर भी पड़ता है। इसलिए नई नीति में वरिष्ठ शिक्षकों को राहत देने की दिशा में विचार किया जा रहा है।
युवा शिक्षकों को मिल सकती है अतिरिक्त जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग का मानना है कि 25 से 30 वर्ष की आयु के शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय होते हैं और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने में सक्षम होते हैं। इसी कारण कम उम्र या कम वरिष्ठता वाले अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना पर काम चल रहा है।
बेहतर माहौल से सुधरेगी पढ़ाई की गुणवत्ता
सरकार का कहना है कि यदि शिक्षक अपने घर के अपेक्षाकृत नजदीक या सुविधाजनक स्थान पर कार्य करेंगे, तो उनका मानसिक तनाव कम होगा। इससे वे कक्षा में अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकेंगे और विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि नई ट्रांसफर नीति का उद्देश्य केवल तबादला करना नहीं, बल्कि पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाना है।