कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं। कई विधानसभा क्षेत्रों में महिला वोटरों की संख्या पुरुषों से अधिक है, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार सत्ता की चाबी महिलाओं के हाथ में हो सकती है। राजनीतिक दल भी अब महिला मतदाताओं को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं।
महिला वोटरों का बढ़ता प्रभाव
दूसरे चरण के मतदान वाले कई क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा दर्ज की गई है। जादवपुर विधानसभा इसका बड़ा उदाहरण है, जहां पुरुषों की तुलना में 11 हजार से अधिक महिला वोटर हैं। पनिहाटी सीट, जहां भाजपा ने आरजीकर पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाया है, वहां भी महिला वोटरों की संख्या अधिक है। इससे यह सीट और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है।
बेहला पश्चिम से टॉलीगंज तक महिलाओं का दबदबा
बेहला पश्चिम, टॉलीगंज, रसबेहरी, बारानगर, बर्धमान दक्षिण, कस्बा और बिधाननगर जैसी कई सीटों पर महिला मतदाता संख्या में आगे हैं। बेहला पश्चिम में लगभग 1.37 लाख महिला वोटर हैं, जबकि पुरुष मतदाता 1.28 लाख के आसपास हैं। इसी तरह बारासात और चंपादानी जैसे क्षेत्रों में भी महिला मतदाता मामूली अंतर से आगे हैं।
सिर्फ सूची में नहीं, मतदान में भी आगे महिलाएं
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महिला वोटर सिर्फ वोटर लिस्ट में ही नहीं, बल्कि मतदान प्रतिशत में भी पुरुषों से आगे हैं। पहले चरण के मतदान में महिलाओं की भागीदारी 92.7 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि महिलाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पहले चरण में भी दिखा महिला शक्ति का असर
पहले चरण के मतदान में भी कई सीटों पर महिला वोटरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। कुर्सियांग, सीतलकुची और दार्जिलिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही। कुर्सियांग में महिला वोटरों ने पुरुषों की तुलना में हजारों की संख्या में ज्यादा मतदान किया। यह ट्रेंड दूसरे चरण में भी जारी रहने की संभावना है।
राजनीतिक दलों की नजर महिला वोट बैंक पर
बंगाल की राजनीति में महिला वोट बैंक हमेशा से प्रभावशाली रहा है, लेकिन इस बार इसका असर और भी ज्यादा दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम दल—सभी महिला सुरक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक योजनाओं को अपने प्रचार का मुख्य हिस्सा बना रहे हैं। क्योंकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि बंगाल की सत्ता का रास्ता महिलाओं के वोट से होकर गुजरता है।