अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने जनवरी 2026 की ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसमें स्पष्ट संकेत मिला है कि विश्व अर्थव्यवस्था का केंद्र एशिया की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में चीन ने सबसे अधिक 26.6% का योगदान दिया, जबकि भारत 17% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। दोनों देशों का संयुक्त योगदान वैश्विक वृद्धि का 43.6% बनता है, जो एशिया के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को रेखांकित करता है।
अमेरिका की हिस्सेदारी में गिरावट, यूरोप दबाव में
रिपोर्ट में अमेरिका को 9.9% योगदान के साथ तीसरे स्थान पर रखा गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में कमज़ोर प्रदर्शन को दर्शाता है। यूरोप में स्थिति और चुनौतीपूर्ण दिखाई दी। जर्मनी का योगदान मात्र 0.9% दर्ज हुआ, जो महाद्वीप की धीमी आर्थिक गति का संकेत है। रिपोर्ट बताती है कि राजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा संकट और निवेश में कमी यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बनाए हुए हैं।
उभरते बाजारों का स्थिर प्रदर्शन
आईएमएफ के आकलन में अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी उल्लेखनीय रहीं। इंडोनेशिया 3.8%, तुर्की 2.2%, सऊदी अरब 1.7%, वियतनाम 1.6%, नाइजीरिया 1.5% और ब्राजील 1.5% ने वैश्विक विकास में अपनी हिस्सेदारी दर्ज की। रिपोर्ट इंगित करती है कि उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाएँ घरेलू खपत, युवा श्रम बल और स्थिर नीतियों के कारण बेहतर स्थिति में हैं।
वैश्विक वृद्धि और महंगाई का आउटलुक
आईएमएफ ने अनुमान व्यक्त किया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि 3.3% और 2027 में 3.2% रह सकती है। यह अनुमान पिछले आकलन से थोड़ा बेहतर है, जो महामारी के बाद आर्थिक पुनरुद्धार के मजबूत होने का संकेत देता है। वैश्विक महंगाई में भी धीमी गिरावट की संभावना जताई गई है। अमेरिका में मुद्रास्फीति लक्ष्य स्तर के निकट पहुंच रही है, जबकि कई एशियाई देशों ने भी मूल्य स्थिरता बनाए रखी है। हालांकि रिपोर्ट ने चेताया है कि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विवाद और बढ़ता कर्ज़ भविष्य की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
एलन मस्क की प्रतिक्रिया और भारत की बढ़ती भूमिका
टेक उद्योग के प्रमुख उद्यमी एलन मस्क ने रिपोर्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए लिखा कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब बदल रहा है। उनकी यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी। मस्क हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी कर चुके हैं, जिसे भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
आर्थिक केंद्र का एशिया की ओर झुकाव
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि आने वाले वर्षों में एशिया वैश्विक अर्थव्यवस्था के फैसलों में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा। चीन अपनी विशाल अर्थव्यवस्था और उत्पादन क्षमता के कारण मजबूती से आगे बढ़ रहा है, जबकि भारत तेज विकास दर, बढ़ते निवेश और बड़ी युवा जनसंख्या के दम पर वैश्विक मंच पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अब आर्थिक बहसों, निवेश रणनीतियों और वित्तीय निर्णयों का केंद्र धीरे-धीरे एशिया होता जा रहा है।
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